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‘रंगभूमि’ का रंग और उसकी भूमि

प्रेमचंद का साहित्य जब से कॉपीराईट मुक्त हुआ है तब से उनकी कहानियों-उपन्यासों के इतने प्रकाशनों से इतने आकार-प्रकार के संस्करण छपे हैं कि कौन सा पाठ सही है कौन सा गलत इसको तय कर पाना मुश्किल हो गया है. बहरहाल, मुझे उनका सबसे प्रासंगिक उपन्यास ‘रंगभूमि’ लगता है. इतना …

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महात्मा से गांधी तक

आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है. एक समाचारपत्र के लिए महात्मा गांधी की समकालीन छवियों पर लिखा था. आज उनकी स्मृति में समय हो तो पढ़कर बताइयेगा- प्रभात रंजन ========================================= असगर वजाहत के नाटक गोडसे@गांधी.कॉम में नवीन नामक एक विद्यार्थी गांधी जी के पास आता है। गांधी जी उससे पूछते …

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वह आज के हिंदी समाज की अंतरात्मा की आवाज थीं

आज ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ अखबार ने कृष्णा सोबती को श्रद्धांजलि स्वरुप सम्पादकीय लिखा है. आज अखबार में यही एक सम्पादकीय है. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ===================================== जिस किसी ने 90 साल की उम्र में अस्वस्थता के बावजूद 1 नवंबर, 2015 को दिल्ली के मावलंकर सभागार के मंच तक व्हीलचेर पर आईं …

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हिंदी सिनेमा का हरफनमौला विजय आनंद

कल प्रसिद्ध फ़िल्मकार, अभिनेता विजय आनंद की जन्मतिथि थी. उनके बारे में एक एक सूचनात्मक लेख लिखा है नवीन शर्मा ने- मॉडरेटर विजय आनंद को हिंदी सिनेमा का हरफनमौला खिलाड़ी कहना ज्यादा सही रहेगा। वे बेहतरीन निर्देशक थे, संवेदनशील अभिनेता भी थे। इसके साथ साथ वे लेखक और अच्छे एडिटर …

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मोतिहारी में जन्मा लेखक जो भविष्य देखता था

आज जॉर्ज ऑरवेल की पुण्यतिथि है. यह लेख लिखा है झारखण्ड के पत्रकार-लेखक नवीन शर्मा ने- मॉडरेटर =================== विश्व साहित्य में अंग्रेजी के प्रसिद्ध उपन्यास 1984 और एनिमल फार्म विशिष्ट स्थान रखते हैं। इन कालजयी किताबों के लेखक जार्ज ओरवेल का जन्म 25 जून 1903  बिहार के मोतिहारी में हुआ …

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छोटे शहर के युवाओं में गंभीरता बढ़ी है

मनीष पुष्कले बेहद चर्चित चित्रकार हैं और साथ ही बेहद संवेदनशील लेखक भी. आज प्रभात खबर में प्रकाशित उनका यह लेख युवाओं को अवश्य पढना चाहिए. जिन्होंने न पढ़ा हो उनके लिए हम प्रस्तुत कर रहे हैं- मॉडरेटर ====================== पिछले कुछ सालों से विभिन्न शहरों, धाराओं और अनेक तबकों के …

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अमृत रंजन के कविता संकलन ‘जहाँ नहीं गया’ की भूमिका

हाल में ही जानकी पुल के संपादक और युवतम कवि अमृत रंजन का कविता संकलन ‘जहाँ नहीं गया’ नयी किताब प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. आप किताब की भूमिका पढ़ सकते हैं जो मैंने लिखी है. पुस्तक मेले में यह किताब नयी किताब के स्टाल पर उपलब्ध है. आप चाहें …

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अपना शहर पराया शहर

भाषा एवं शिक्षा शास्त्र विशेषज्ञ कौशलेन्द्र प्रपन्न का यह लेख शहरों के अपने परायेपन को लेकर है. बेहद आत्मीय गद्य- मॉडरेटर ==================== शहर किसी का भी हो वह हमें ताउम्र प्यारा होता है। बार बार लौटकर अपने शहर आने का लोभ हम रोक नहीं पाते। कहीं भी रहें। देश दुनिया …

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बीतता साल साहित्य का हाल

अजमेर में प्राध्यापिका विमलेश शर्मा ने साल 2018 के साहित्यिक परिदृश्य का लेखा जोखा प्रस्तुत किया है. लेख में व्यक्त विचार लेखिका के अपने हैं- मॉडरेटर ======================================= और शब्द-रथ पर यों ही कारवाँ चलता रहे… “मुझमें जीवन की लय जागी मैं धरती का हूँ अनुरागी जड़ीभूत करती है मुझको यह …

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इतिहास के गड़े मुर्दे, धर्म और इतिहास

इतिहासकार रज़ीउद्दीन अक़ील लगातार हिंदी में लिखते हैं और अनेक संवेदनशील विषयों से हिंदी भाषा को समृद्ध करते हैं. जैसे यह लेख देखिये जिसमें इतिहास लेखन और धर्म के विषय पर उन्होंने स्पष्ट सोच के साथ लिखा है- मॉडरेटर ======================== वैचारिक संघर्षों और पहचान की राजनीति में इतिहास का इस्तेमाल …

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