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लेख

तथ्य और सत्य के बीच फेक न्यूज

युवा पत्रकार अरविन्द दास का यह लेख फेक न्यूज को लेकर चल रही बहस को कई एंगल से देखता है. उसके इतिहास में भी जाता है और वर्तमान पेचीदिगियों से भी उलझता है. अरविन्द दास पत्रकार हैं, पत्रकारिता पर शोध कर चुके हैं और हाल में ही उनके लेखों का …

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रेंगने वाली हिंदी अब उड़ रही है!

हिंदी की स्थिति पर मेरा यह लेख ‘नवभारत टाइम्स’ मुम्बई के दीवाली अंक में प्रकाशित हुआ है- प्रभात रंजन =========================== मेरी बेटी नई किताबों को खरीदने के लिए सबसे पहले किंडल स्टोर देखती है, जहाँ अनेक भाषाओं में लाखों ईबुक मौजूद हैं जिनमें से वह अपनी पसंद की किताब खरीद …

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यह सामा-चकेवा का मौसम है

कार्तिक मास के बढ़ते चाँद के साथ मिथिला-तिरहुत के लोगों की स्मृतियों में सामा चकेवा आ जाता है. भाई-बहन के प्रेम के इस पर्व पर यह लेख लिखा है मुकुल कुमारी अलमास ने- मॉडरेटर ============ कार्तिक माह का शुक्लपक्ष जब भी आता है और मैं दिन-दिन बढ़ते चाँद को देखती …

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दरवेश सोई जो दर की जानें

रज़ीउद्दीन अक़ील दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में असोसियेट प्रोफ़ेसर हैं. मध्यकालीन इतिहास के वे उन चंद विद्वानों में हैं जिन्होंने अकादमिक दायरे से बाहर निकलकर आम पाठकों से संवाद करने की कोशिश की है, किताबें लिखी हैं. वे किताबें जरूर अंग्रेजी में लिखते हैं लेकिन बहुत अच्छी हिंदी भी …

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दोन किख़ोते: विश्व साहित्य की एक धरोहर

स्पैनिश साहित्य की अमर कृति ‘दोन किख़ोते’ पर यह लेख सुभाष यादव ने लिखा है. वे हैदराबाद विश्वविद्यालय में स्पैनिश भाषा के शोधार्थी हैं, मूल स्पैनिश भाषा से हिंदी में अनुवाद करते हैं. एक विस्तृत और रोचक लेख- मॉडरेटर ============================= वैसे भी भला नाम में  में क्या रखा है जो …

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हे दीनानाथ, सबको रौशनी देना!

युवा संपादक-लेखक सत्यानन्द निरुपम का यह लेख छठी मैया और दीनानाथ से शुरू होकर जाने कितने अर्थों को संदर्भित करने वाला बन जाता है. ललित निबंध की सुप्त परम्परा के दर्शन होते हैं इस लेख में. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर =============== छठ-गीतों में ‘छठी मइया’ के अलावा जिसे सर्वाधिक सम्बोधित …

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नागार्जुन से तरौनी कभी छूटा नहीं

आज बाबा नागार्जुन की पुण्यतिथि है. इस अवसर पर युवा पत्रकार-लेखक अरविन्द दास का यह लेख प्रस्तुत है, जिसमें उनके गाँव तरौनी की यात्रा का भी वर्णन है. यह लेख उनके शीघ्र प्रकाश्य पुस्तक ‘बेखुदी में खोया शहर: एक पत्रकार के नोट्स’ में संकलित है. बाबा को सादर प्रणाम के …

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कांग्रेस साध नहीं पाई सारे समीकरण

कल कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे सुबह भाजपा की असाधारण जीत की तरह लग रहे थे लेकिन दोपहर होते होते वह बहुमत से दूर हो चुकी थी. कर्नाटक चुनाव के इन्हीं नतीजों का आज बहुत अच्छा विश्लेषण ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में मनीषा प्रियम ने किया है. आपके पढने के लिए साभार- …

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मिथिला से रवीन्द्रनाथ टैगोर के आत्मीय रिश्ते थे

आज रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती थी. उनके जीवन-लेखन से जुड़े अनेक पहलुओं की चर्चा होती है, उनपर शोध होते रहे हैं. एक अछूते पहलू को लेकर जाने माने गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने यह लेख लिखा है. बिहार के मिथिला प्रान्त से उनके कैसे रिश्ते थे? एक रोचक और शोधपूर्ण लेख- जानकी पुल. …

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पत्रकारों की सुरक्षा की चिंता किसे है?

ईयू-एशिया न्यूज़ के नई दिल्ली संपादक पुष्प रंजन जी को पढना बहुत ज्ञानवर्धक होता है. हिंदी अखबारों में ऐसे लेख कम ही पढने को मिलते हैं. पत्रकारों की सुरक्षा का सवाल आज कितने अख़बार और पत्रकार उठा रहे हैं? इस लेख में कई देशों के आंकड़े हैं और उन आंकड़ों …

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