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मीना कुमारी और तन्हाई का अंधा शिगाफ़ : भाग-1

ख़ुद ही को तेज़ नाख़ूनों से हाए नोचते हैं अब हमें अल्लाह ख़ुद से कैसी उल्फ़त होती जाती है – मीना कुमारी भारतीय सिनेमा की मशहूर अदाकारा मीना कुमारी के बारे में हम सब टुकड़ों-टुकड़ों में बहुत कुछ जानते हैं। लेकिन बहुत कुछ है जो अनकहा है, अनसुना है। आज …

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युवा शायर #18 प्रदीप ‘तरकश’ की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है प्रदीप ‘तरकश’ की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 मैं अगर हूँ भी तो बाज़ार की सूरत में नहीं सो मैं तुझ ऐसे ख़रीदार की क़िस्मत में नहीं इतना कहना है मुझे प्यार बहुत है तुम से और ये भी कि ये कहना मेरी …

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युवा शायर #17 सग़ीर आलम की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है सग़ीर आलम की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 कैसे कैसे मंज़र मेरी आँखों में आ जाते हैं, यादों के सब खंजर मेरी आँखों में आ जाते हैं। मेरी प्यासी आंखें फिर भी रह जाती हैं प्यासी ही, यूँ तो सात समंदर मेरी आँखों …

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युवा शायर #16 अक्स समस्तीपुरी की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है अक्स समस्तीपुरी की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 जुदाई में तेरी आंखों को झील करते हुए सबूत ज़ाया किया है दलील करते हुए मैं अपने आप से खुश भी नहीं हूँ जाने क्यों सो खुश हूँ अपने ही रस्ते तवील करते हुए न जाने …

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युवा शायर #15 स्वप्निल तिवारी की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है स्वप्निल तिवारी की ग़ज़लें – त्रिपुरारि  ====================================================== ग़ज़ल-1 मेरे चारों सिम्त पहले जमअ तन्हाई हुई दिल-कचहरी में मिरी तब जा के सुनवाई हुई रेत पर लेटी हुई थी शाम लड़की सी किसी धूप से साहिल पे पूरे दिन की सँवलाई हुई धीरे धीरे …

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फ़िल्म हो या जीवन, राज कपूर हर चीज़ ग्रैंड चाहते थे

हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री के सबसे पहले शोमैन राज कपूर की आज पुण्यतिथि है. उनकी फ़िल्मों का जलवा ऐसा है कि आज भी उनके काम और स्टाइल की मिसाल दी जाती है. उनके पुत्र ऋषि कपूर की इसी साल प्रकाशित आत्मकथा खुल्लम खुल्ला में उन्होंने एक अध्याय अपने पिता को समर्पित …

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युवा शायर #13 अभिषेक शुक्ला की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है अभिषेक शुक्ला की ग़ज़लें – त्रिपुरारि  ====================================================== ग़ज़ल-1 हर्फ़ लफ़्ज़ों की तरफ़ लफ़्ज़ म’आनी की तरफ़ लौट आए सभी किरदार कहानी की तरफ़ होश खो बैठा था मैं ज़र्दी-ए-जाँ से और फिर इक हवा आई उड़ा ले गई पानी की तरफ़ पहले मिसरे …

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युवा शायर #12 अब्बास क़मर की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है अब्बास क़मर की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ==================================================== ग़ज़ल-1 मेरी परछाइयां गुम हैं मेरी पहचान बाक़ी है सफ़र दम तोड़ने को है मगर सामान बाक़ी है अभी तो ख़्वाहिशों के दरमियां घमसान बाक़ी है अभी इस जिस्मे-फ़ानी में ज़रा सी जान बाक़ी है इसे …

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लुगदी के जासूस और लुगदी के लेखक

कल रायपुर से प्रकाशित होने वाले अखबार ‘नवभारत’ में हिंदी जासूसी उपन्यास के इतिहास और परंपरा को लेकर मेरा यह लेख प्रकाशित हुआ था. आप पढना चाहते हैं तो यहाँ पढ़ सकते हैं- प्रभात रंजन ========================================== फ़रवरी के महीने में वेद प्रकाश शर्मा का देहांत हुआ तो जैसे हिंदी जासूसी …

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