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व्यंग्य

 आप सब को हैप्पी यौम-ए-मोहब्बत डे!

आज वैलेंटाइन डे है. सदफ़ नाज़ अपने पुराने चुटीले अंदाज़ में लौटी हैं. कुछ मोहब्बत की बातों के साथ, कुछ तहजीब-संस्कृति की बातों के साथ-मॉडरेटर ================== 14 फ़रवरी के दिन डंडे वाले बिग्रेड के नुमाइंदे मोहब्बत के मारों पर यूं पिल पड़ते हैं मानों ये जोड़े शीरीं फ़रहाद के नक्शे-ए-क़दम …

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पाकिस्तान का नमक खाया है

नॉर्वे-प्रवासी डॉक्टर व्यंग्यकार प्रवीण कुमार झा आज नए व्यंग्य के साथ- मॉडरेटर  =======================================================   मैं पाकिस्तान का नमक खाता हूँ। भड़किये नहीं! मैं ही नहीं, कई प्रवासी भारतीय पाकिस्तान का नमक-मसाला खाते हैं। दरअसल, यहाँ जितने भारतीय नमक-मसाले की दुकानें हैं, पाकिस्तानियों की है। अधिकतर रेस्तराँ, जिनमें हर तीसरे का …

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मैं भारतीय हूँ, और मैं रेफूजी नहीं

दिल्ली के इरविन हॉस्पिटल से पढाई करने के बाद प्रवीण कुमार झा अमेरिका में चिकित्सक बने. आजकल नॉर्वे में हैं. वहीं से उन्होंने एक मार्मिक पत्र भेजा है. आप सब भी पढ़ें- मॉडरेटर  ===========================================================   बड़ा अजीब देश है। जिसे देखो कान में हेडफोन लगाये कहीँ भाग रहा है? किस …

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लव जेहाद बनाम दिलजलियां

सदफ़ नाज़ धनबाद में रहती हैं, पत्रकारिता करती हैं. ‘लव जिहाद’ पर सोचने बैठी तो ऐसा व्यंग्य लिख गई कि हँसते हँसते पेट में बल पड़ जाएँ. एकदम उर्दू शैली का व्यंग्य शुद्ध देवनागरी में. यह भी तो एक तरह से भाषा में ‘लव जिहाद’ ही ठहरा- मॉडरेटर. =========================== ‘इन-उन …

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साहित्य एक टक्कर है। एक्सीडेंट है।

प्रसिद्ध आलोचक सुधीश पचौरी ने इस व्यंग्य लेख में हिंदी आलोचना की(जिसे मनोहर श्याम जोशी ने अपने उपन्यास ‘कुरु कुरु स्वाहा’ में खलीक नामक पात्र के मुंह से ‘आलू-चना’ कहलवाया है) अच्छी पोल-पट्टी खोली है. वास्तव में रचनात्मक साहित्य की जमीन इतनी बदल चुकी है कि हिंदी आलोचना की जमीन …

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