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समीक्षा

‘गंदी बात’ के बहाने कुछ अच्छी गन्दी बात

क्या ज़माना आ गया है! पहले लिखने का मतलब होता था कुछ अच्छी अच्छी बातें. आजकल लेखक उपन्यास लिखते हैं और उसका नाम ही रख देते हैं ‘गंदी बात’. क्षितिज रॉय का उपन्यास ‘गंदी बात’ चुटीली भाषा में लिखा गया एक उपन्यास है, उसको पढ़कर कटीली भाषा में युवा पत्रकार-लेखिका …

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लेडी मंटो का पतनशील पत्नियों को सलाम 

पिछले एक महीने से एक किताब की बड़ी चर्चा है ‘पतनशील पत्नियों के नोट्स’. लेखिका नीलिमा चौहान की यह किताब एक मुश्किल किताब है. मुश्किल इस अर्थ में कि इसका पाठ किस तरह से किया जाए कि कुपाठ न हो जाए. एक मुश्किल विषय पर एक साहसिक किताब है. आज …

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‘हाफ गर्लफ्रेंड’ से क्या सीख मिलती है?

चेतन भगत ने एक बड़ा काम यह किया है कि उसने ऐसे दौर में जबकि पढना लोगों की जीवन शैली से से दूर होता जा रहा है, पढने को फैशन से जोड़ा है, उसकी पहुँच बढ़ाई है, उसका दायरा बढ़ाया है. हम अक्सर उसके लेखन की आलोचना करते हुए इस …

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केदारनाथ सिंह हमारी भाषा के मीर तकी मीर हैं

80 साल की उम्र में केदारनाथ सिंह का आठवाँ कविता संग्रह आया है- ‘सृष्टि पर पहरा’। अपनी जमीन पर इतनी दूर तक इतनी मजबूती के साथ खड़ा शायद ही कोई दूसरा कवि दिखाई देता हो। प्रियदर्शन ने इन कविताओं के बहाने केदार जी की कविताई-जमीन पर बढ़िया लिखा है, अपने …

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हिंदी अनुवाद में अमिताव घोष का उपन्यास ‘सी ऑफ पॉपीज़’

हिंदी में अमिताव घोष का सी ऑफ पॉपीज़ अफीम सागर के नाम से प्रकाशित हुआ है. ध्यान रहे कि इस उपन्यास की कथा का क्षेत्र पूर्वी भारत है. कहानी उस दौर की है जब वहाँ से लोगों को गिरमिटिया बनाकर मॉरिसस और कैरेबियाई देशों में भेजा जा रहा था. हिंदी …

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जे.एम. कोएत्जी का उपन्यास ‘समरटाइम’ और लेखक का जीवन

2009 में जे. एम. कोएत्जी के उपन्यास ‘समरटाइम’ पर लिखा था. लेखक के जीवन की निस्सारता को लेकर एक अच्छा उपन्यास है- प्रभात रंजन ================ स्पेनिश भाषा के कद्दावर लेखक मारियो वर्गास ल्योसा ने अपनी पुस्तक लेटर्स टु ए यंग नॉवेलिस्ट में लिखा है कि सभी भाषाओं में दो तरह …

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