Home / समीक्षा (page 12)

समीक्षा

एक लगभग अलक्षित चली गई किताब के बारे में कुछ जरूरी बातें

2016 में सिनेमा, मीडिया की भाषा पर एक ठोस किताब आई ‘मीडिया की भाषा लीला’. इतिहासकार रविकांत की इस किताब पर किसी प्रोमो राइटर ने लिखा, इसको कहीं कोई पुरस्कार नहीं मिला. लेकिन बरसों तक सन्दर्भ पुस्तक के रूप में इसको संदर्भित किया जायेगा. इसके गहरे शोध और इसमें व्यक्त …

Read More »

‘लता सुर-गाथा’- आलोचना नहीं श्रद्धा की कथा

इस साल निस्संदेह यतीन्द्र मिश्र की किताब ‘लता: सुर गाथा’ हिंदी की सर्वाधिक चर्चित किताब रही. लेकिन इस किताब को लेकर कोई विस्तृत टिप्पणी या समीक्षा पढने में नहीं आई है. आज कल समीक्षा की जगह पर प्रोमोशन चलने लगा है. किताब चाहे कितनी भी बड़ी हो, उसका विषय कितना …

Read More »

हुसैन हक्क़ानी की किताब में हिन्दुस्तान-पाकिस्तान

हिन्दुस्तान और पाकिस्तान में दुश्मनी बढती जा रही है. दोस्ती की गुंजाइश कम होती जा रही है. जगरनॉट से प्रकाशित हुसैन हक्कानी की किताब ‘भारत vs पाकिस्तान: हम क्यों दोस्त नहीं हो सकते’ में यही बताया गया है. हुसैन हक्कानी पाकिस्तान के चार प्रधानमंत्रियों के सलाहकार रह चुके हैं इसलिए उनकी …

Read More »

कितनी सारी देवियां, कितनी सारी स्त्रियां, कितनी सारी कथाएं

भारत में देवी के मिथक को समझने के लिहाज से, देवी के अलग रूपों को समझने के लिहाज से देवदत्त पट्टनायक की पुस्तक ‘भारत में देवी अनंत नारीत्व के पांच स्वरूप’ बहुत उपयोगी है. मूल अंग्रेजी में लिखी गई इस किताब के हिंदी अनुवाद की बहुत अच्छी समीक्षा जाने-माने लेखक प्रियदर्शन …

Read More »

अफसानों में उभरा फसाद का दर्द

राजकमल प्रकाशन से जुबैर रिजवी के संपादन में एक किताब आई है ‘फसादात के अफ़साने’ यानी दंगों से जुड़ी कहानियां. नागेश्वर पांचाल ने इस किताबा पर लिखा है- मॉडरेटर =============================== फ़सादत के अफ़साने, जुबैर रज़वी द्वारा सम्पादित हिन्दुस्तान के फसादात के अफ़सानों का संग्रह है | फ़सादत के किस्सों पर …

Read More »

मुक्ति-भवन – मोक्ष का वेटिंग रूम

कुछ फ़िल्में ऐसी होती है जो लीक से हटकर होती हैं। जिसे कुछ ख़ास तरह के लोग पसंद करते हैं। ऐसी ही फ़िल्म है मुक्ति भवन। फ़िल्म के बारे में युवा लेखक नागेश्वर पांचाल ने लिखा है। आप भी पढ़िए – सम्पादक ======================================================== गुस्ताव फ्लौबेर्ट कहते है “देयर इज नो …

Read More »

ऐसा नॉवेल, जिसे पढ़ने के लिए उर्दू सीखी जा सकती है

पिछले साल उर्दू में एक किताब छपी थी। नाम है- रोहज़िन, जो रहमान अब्बास का लेटेस्ट नॉवेल है। ग़ौर करने लायक बात ये है कि छपने से लेकर आज तक इस किताब ने उर्दू की गलियों में धूम मचा रखी है। किताब से गुज़रते हुए कई बातें ख़याल में आती …

Read More »

औरतों की संगीतमय दुनिया ‘समरथ’

हुआ यूँ कि जानी मानी थिएटर आर्टिस्ट/लेखिका विभा रानी ब्रेस्ट कैंसर की शिकार हुईं और अपनी मजबूत जिजीविषा के कारण इस बीमारी से उबर भी गईं। लेकिन बीमारी के दौरान वो अपने मन की बात काग़ज़ों पर दर्ज़ करती रहीं। वो बातें, एक कविता संग्रह के रूप में प्रकाशित हुई …

Read More »

ज़िन्दगी लाइव: फंतासी झूठ नहीं, संभावना है!

किताबों के बाजार की सबसे बड़ी ब्यूटी यह होती है कि जिस किताब को लेखक-प्रकाशक चलाना चाहता है वह अक्सर नहीं चल पाती है लेकिन जिसे वह साधारण समझता है वह असाधारण रूप से पाठकों के बीच छा जाती है. प्रियदर्शन के पहले उपन्यास ‘ज़िंदगी लाइव’ के साथ यही हुआ. …

Read More »