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समीक्षा

  समाज और कविता दोनों जेंडर न्यूट्रल हों

स्त्रीवादी आलोचक रेखा सेठी की दो किताबें हाल में आई हैं ‘स्त्री कविता: पक्ष और परिप्रेक्ष्य’ तथा ‘स्त्री कविता: पहचान और द्वन्द्व’। जिनमें हिंदी की कवयित्रियों की चर्चा है और उनकी रचनाओं की आलोचना भी। यह एक शोधपरक दस्तावेज़ी काम है। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इन किताबों की समीक्षा की …

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ज़ेहन रोशन हो तो बाहर के अँधेरे उतना नहीं डराते

गीताश्री के उपन्यास ‘वाया मीडिया’ एक अछूते विषय पर लिखा गया है। इसको पढ़ने वाले इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहते। यह उनके किताब की एक खास समीक्षा है क्योंकि इसे लिखा है वंदना राग ने। वंदना जी मेरी प्रिय लेखिकाओं में हैं और इस साल उनका एक बहुत प्यारा …

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स्त्री के सशक्त एकांत और दुरूह आरोहण की कविताएँ

रश्मि भारद्वाज का कविता संग्रह ‘मैंने अपनी माँ को जन्म दिया है’ जब से प्रकाशित हुआ है चर्चा में है। सेतु प्रकाशन से प्रकाशित इस संग्रह की कविताओं की एक विस्तृत समीक्षा राजीव कुमार ने लिखी है। आप भी पढ़ सकते हैं। =============== रश्मि भारद्वाज का काव्य संग्रह “मैंने अपनी …

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कोरियाई उपन्यास ‘सिटी ऑफ़ ऐश एंड रेड’ और महामारी

महामारी के काल को लेकर बहुत लिखा गया है। अलग अलग भाषाओं में लिखा गया है। आज एक कोरियाई उपन्यास ‘सिटी ऑफ़ ऐश एंड रेड’ की चर्चा। लेखक हैं हे यंग प्यून। इस उपन्यास पर लिखा है कुमारी रोहिणी ने, जो कोरियन भाषा पढ़ाती हैं ===================== लॉकडाउन के इस दौर …

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पीयूष दईया के कविता संग्रह ‘तलाश’ पर अरूण देव की टिप्पणी

कवि पीयूष दईया का कविता संग्रह हाल में ही आया है ‘तलाश’, जिसे राजकमल प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। वे हिंदी की कविता परम्परा में भिन्न तरीक़े से हस्तक्षेप करने वाले प्रयोगवादी कवि हैं। इस संग्रह की कविताओं पर कवि अरूण देव ने यह सुंदर टिप्पणी की है- मॉडरेटर ============= …

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ये रौशनी में कोई और रौशनी कैसी

‘मौजूद की निस्बत से’ महेंद्र कुमार सानी का पहला शे’री मज्मूआ है जो रेख़्ता से प्रकाशित हुआ है । इसकी भूमिका प्रसिद्ध शा’इर और सम्पादक आदिल रज़ा मंसूरी ने लिखी है। उन्होंने सानी के मुख़्तलिफ़ तख़्लीक़ी पहलुओं पर इस तरह रौशनी डाली है कि क़ारी की अपेक्षाएँ बढ़ जाती हैं …

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‘स्व’ रहित स्वाभिमान और स्त्री-विमर्श के मूलभूत सिद्धांतो की जुगलबंदी की कहानी

वरिष्ठ लेखिका गीताश्री का उपन्यास ‘वाया मीडिया – एक रोमिंग रिपोर्टर की डायरी’ इस साल विश्व पुस्तक मेले में आया था। कुछ महिला पत्रकारों के कामकाज पर आधारीय यह उपन्यास बहुत अलग ज़मीन का उपन्यास है। आज इसकी समीक्षा लिखी है युवा लेखिका अणुशक्ति सिंह ने- मॉडरेटर =========================== लफ़्ज़ों की …

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नक्शे, सरहदें, शांति,  लघु जीवन और कला की एकरूपता से सजी है ‘बिसात पर जुगनू’

वंदना राग के उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ पर यह टिप्पणी राजीव कुमार की ने लिखी है। उपन्यास राजकमल से प्रकाशित है- =============== “हम सब इत्तिहाद से बने हैं। हम सबमें एक दूसरे का कोई ना कोई हिस्सा है। इंसान इस सच से रू – ब – रू हो जाए तो …

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वाह उस्ताद : फनकार और सुनकार का साझा घराना

प्रवीण कुमार झा की किताब ‘वाह उस्ताद’ की समीक्षा लिखी है डॉक्टर असित कुमार गोस्वामी ने। देश विदेश में  अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके सितार वादक और साहित्य प्रेमी डॉ असित गोस्वामी वर्तमान में बीकानेर के राजकीय कन्या महाविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. यह किताब राजपाल एंड संज से …

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एक भू सुंघवा लेखक की यात्राएँ

राकेश तिवारी के यात्रा वृत्तांत ‘पहलू में आए ओर-छोर : दो देश चिली और टर्की’ पर प्रसिद्ध लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ की टिप्पणी। पुस्तक का प्रकाशन सार्थक, राजकमल ने किया है- ======== यात्रावृत्तातों की शैली में रोचक प्रयोग, मीठी व्यंजना, लोक भाषा के प्रयोग, पुरावेत्ता ( जिसे वे स्वयं भू सुंघवा कहते …

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