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समीक्षा

‘ब्रह्मभोज’ पर उपासना झा की टिप्पणी

सच्चिदानंद सिंह के कहानी संग्रह ‘ब्रह्मभोज’ पर युवा लेखिका उपासना झा की टिप्पणी पढ़िए- मॉडरेटर ================================================ हिंदी-साहित्य में लगातार बिना शोर-शराबे और सनसनी के भी लेखन होता रहा है। सच्चिदानद सिंह का पहला कहानी संग्रह ‘ब्रह्मभोज’ इसी कड़ी में रखा जा सकता है। जीवन के अनुभवों और लेखकीय निरपेक्षता को समेटे …

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‘बहत्तर धडकनें तिहत्तर अरमान’ और एक समीक्षा

समकालीन पीढ़ी की सिद्धहस्त लेखिका आकांक्षा पारे काशिव का कहानी संग्रह आया है ‘बहत्तर धडकनें तिहत्तर अरमान’. आकांक्षा चुपचाप अपना काम करती हैं, बिना किसी शोर शराबे के. उनकी कहानियों में जो ‘विट’ होता है वह किसी समकालीन लेखक की रचनाओं में नहीं है. आज उनके इस संग्रह की समीक्षा …

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‘ देह ही देश ‘ स्त्री यातना का लोमहर्षक दस्तावेज़ है

गरिमा श्रीवास्तव की किताब ‘देह ही देश’ पर यह टिप्पणी कवयित्री स्मिता सिन्हा ने लिखी है. यह किताब राजपाल एंड संज से प्रकाशित है- मॉडरेटर ================ कुछ किताबें अप्रत्याशित रुप से आपको उन यात्राओं पर ले चलती है जहां यातनायें हैं , हत्यायें हैं , क्रूरता है ,सिहरन है ,  …

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मुखर्जी नगर का यूटोपिया, नीलोत्पल मृणाल और ‘डार्क हॉर्स’

नीलोत्पल मृणाल का उपन्यास ‘डार्क हौर्स’ अपने नए कलेवर में हिन्द युग्म-वेस्टलैंड से छपकर आया है. नए सिरे से उसको लेकर पाठकों-अध्येताओं में उत्साह है. एक टिप्पणी इस उपन्यास पर रोहिणी कुमारी की- मॉडरेटर ================================================== नीलोत्पल मृणाल को किसी ख़ास परिचय की ज़रूरत नहीं और न ही उनकी किताब “डार्क …

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रोज़मर्रा जीवन की सूक्ष्मदर्शी निगाह में कुलबुलाती कहानियाँ हैं ‘आख़िरी गेंद’ 

रामनगीना मौर्य के कहानी संग्रह ‘आखिरी गेंद’ की समीक्षा. लिखी है अबीर आनंद ने. किताब का प्रकाशन रश्मि प्रकाशन से हुआ है- मॉडरेटर =================== ऐसा लगता है जैसे भाषा की रेलगाड़ी कहीं कानपुर के आस-पास से चली हो और अल्हड़ हिचकोले लेते हुए कलकत्ता के किसी स्टेशन पर जाकर रुकी …

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स्त्री-सपनों की बेदखल होती दुनिया का जीवंत यथार्थ

गीताश्री के उपन्यास ‘हसीनाबाद’ की यह समीक्षा युवा कवयित्री-लेखिका स्मिता सिन्हा ने लिखी है. उपन्यास वाणी प्रकाशन से प्रकाशित है- मॉडरेटर ================ गीताश्री ‘हसीनाबाद ‘ एक स्त्री की कहानी , उसके सपनों की कहानी , सपनों को बुनने की ज़िद और उसे पूरा करने की तमाम जद्दोज़हद की कहानी । …

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हॉर्स तो बहुत होते हैं लेकिन विजेता कहलाता है ‘डार्क हॉर्स’

‘नीलोत्पल मृणाल के उपन्यास का शीर्षक ‘डार्क हॉर्स’ प्रोफेटिक साबित हुआ। ऐसे समय में जब हर महीने युवा लेखन के नए नए पोस्टर बॉय अवतरित हो रहे हों नीलोत्पल सबसे टिकाऊ पोस्टर बॉय हैं। वह स्वयं डार्क हॉर्स साबित हुए हैं। यह उनके लेखन की ताकत ही है कि ‘डार्क …

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उलझे जीवन की सुलझी कहानी ‘ज़िन्दगी 50-50’

भगवंत अनमोल का उपन्यास ‘ज़िंदगी 50-50’ इस साल का सरप्राइज़ उपन्यास बनता जा रहा है। हर तरह के पाठकों में अपनी जगह बनाता जा रहा है। इसका पहला संस्करण समाप्त हो गया है। आज इस उपन्यास की समीक्षा लिखी है कवयित्री स्मिता सिन्हा ने- मॉडरेटर ======================== एक ही समाज में …

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अपूर्णता की सम्पूर्णता: जिन्दगी 50-50

युवा लेखक भगवंत अनमोल के उपन्यास ‘ज़िन्दगी 50-50’ की आजकल बहुत चर्चा है. इसी उपन्यास की एक समीक्षा लिखकर भेजी है मिर्जापुर से शुभम् श्रीवास्तव ओम ने. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर =================================== युवा लेखक भगवंत अनामोल का नया उपन्यास ‘जिन्दगी 50-50‘ समाज के उस उपेक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व करता नजर …

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रहस्य-रोमांच राजपरिवार और राजनीति का ‘शाही शिकार’

जगरनॉट बुक्स ने मोबाइल या लैपटॉप पर पढने के लिए अपने ऐप के माध्यम से हिंदी में कई नई तरह की किताबें दी हैं, नए नए प्रयोग किये हैं. अभिषेक सिंघल का उपन्यास ‘शाही शिकार’ उसी की एक कड़ी है. इस उपन्यास की समीक्षा वरिष्ठ लेखक दुर्गा प्रसाद अग्रवाल ने …

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