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स्मरण

धर्मवीर हमारे दौर में कबीर की तरह जिए

धर्मवीर नहीं रहे. सन 2000 के आसपास उनकी पुस्तक ‘कबीर के आलोचक’ ने हिंदी आलोचना को सर के बल खड़ा कर दिया था. भक्तिकाल की जो ब्राह्मणवादी व्याख्याएँ की गई हैं उनके ऊपर वे बहुत तार्किक तरीके से प्रश्न खड़े करते हैं. अगर वे और पुस्तकें न भी लिखते तो …

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साहिर ने सेल्युलाइड के लिए भी वही लिखा जो कागज़ पर लिखते आए थे

कल महान शायर, फिल्मों के सबसे सफल गीतकारों में एक साहिर लुधियानवी का जन्मदिन था. उनके एक दोस्त जोए अंसारी का साहिर पर लिखा यह संस्मरण उनके व्यक्तित्व की कई गिर्हों को खोलता है. दिलचस्प है- मॉडरेटर ======================================================= बम्बई शहर के उबलते हुए बाज़ारों में, साहिलों पर, सस्ते होटलों में …

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उन्होंने ‘लुगदी’ परम्परा को ग्लैमर की ‘वर्दी’ पहनाई

मुझे याद है जब आमिर खान ने अपनी फिल्म ‘तलाश’ का प्रोमोशन शुरू किया था तो वे मेरठ में सबसे पहले वेद प्रकाश शर्मा के घर गए थे. यह हिंदी की लोकप्रिय धारा के लेखन को मिलने वाला विरल सम्मान था. 80 और 90 के दशक में उनके उपन्यासों ने …

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‘मार्क्स के संस्मरण’ किताब से एक अंश

पॉल लाफार्ज और विल्हेम लीबनेख्त द्वारा लिखे गए ‘मार्क्स के संस्मरण‘ के हिंदी अनुवाद से वहीं परिचय हुआ. पॉल लाफार्ज मार्क्स के दामाद थे. इसलिए ये संस्मरण बड़े आत्मीय और विश्वसनीय लगते हैं. पुस्तक का हिंदी अनुवाद किया है हरिश्चंद्र ने और प्रकाशक हैं जन-प्रकाशन गृह, मुंबई. यह संस्मरण ‘हिंदी …

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सआदत हसन मंटो पर कृशन चंदर का संस्मरण

सआदत हसन मंटो की जयंती पर  पढ़िए उनके ऊपर कृशन चंदर का एक दिलचस्प संस्मरण- जानकी पुल. =============== सआदत हसन मंटो: ख़ाली बोतल भरा हुआ दिल  एक अजीब हादसा हुआ है । मंटो मर गया है, गो वह एक अर्से से मर रहा था। कभी सुना कि वह एक पागलखाने में …

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रवीन्द्रनाथ के मिथिला से आत्मीय सम्बंध थे- बुद्धिनाथ मिश्र

आज रवीन्द्र जयंती है. उनके जीवन-लेखन से जुड़े अनेक पहलुओं की चर्चा होती है, उनपर शोध होते रहे हैं. एक अछूते पहलू को लेकर डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने यह लेख लिखा है. बिहार के मिथिला प्रान्त से उनके कैसे रिश्ते थे? एक रोचक और शोधपूर्ण लेख- जानकी पुल. ———————————————————————————————   …

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