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अपर्णा मनोज की कहानी ‘द ब्लू प्रिंट’

उपसंहार से शुरु होने वाली इस कहानी के बारे में वाचिका का कहना है कि यह कहानी नहीं बस उसका खाका है, ‘ब्लू प्रिंट’. कितना कुछ तो होता है जो अनकहा रह जाता है, कितना कुछ अनाम रह जाता है. टुकड़ों-टुकड़ों में, कभी डायरी, कभी जर्नल की शक्ल में जो …

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सपने में सेंध मारने लगा है ईश्‍वर

राकेश श्रीमाल की कविताएँ ‘हिय आँखिन प्रेम की पीर तकी’ के मुहावरे में होती हैं. कोमल शब्द, कोमल भावनाएं, जीवन-प्रसंग- सब मिलकर कविता का एक ऐसा संसार रचते हैं जहाँ ‘एक अकेला ईश्वर’ भी बेबस हो जाता है. उनकी कुछ नई कविताओं को पढते हैं- जानकी पुल. एक अकेला ईश्‍वर …

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कहां हो दिल्ली के परमज्ञानी आचार्य?

जशपुर के ठूंठी अम्बा गाँव में एक पिता जिसकी बेटी हाल में ही लौटी  युवा कथाकार-पत्रकार आशुतोष भारद्वाज छत्तीसगढ़ के ग्रामीण-जंगली इलाकों को एक नई नज़र से देख रहे हैं, ऐसी नज़र से जिसमें लोगों को पहचानने के बने-बनाये सांचे नहीं हैं, बल्कि इंसान तक पहुँचने वाली इंसानी समझ है. …

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क्यों राज्यसभा में ऐसी निष्क्रियता छाई है?

महान आधुनिक ग्रीक कवि कॉन्स्टेनटीन कवाफी की कविताओं के सम्मोहक आकर्षण ने यायावर कवि, ‘कलाबाज़’ पीयूष दईया को अपनी ओर खींचा. उन्होंने उनका हिंदी में अनुवाद किया. यात्रा बुक्स ने उसे संकलन का रूप देकर प्रकाशित किया. इस तरह एक सुन्दर पुस्तक आई- ‘माशूक’. प्रस्तुत हैं उसी संकलन से कुछ …

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ए. के. रामानुजन का लेख ‘तीन सौ रामायणें: पांच उदाहरण और अनुवाद पर तीन विचार’

अभी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान सलमान रुश्दी को लेकर जो हुआ उससे एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस की शुरुआत हो गई है. अधिक दिन नहीं हुए जब कट्टरपंथियों के दबाव में दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास के पाठ्यक्रम से ए.के. रामानुजन के लेख ‘तीन सौ रामायणें: …

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तेजेन्द्र शर्मा की कहानी ‘इंतज़ाम’

तेजेन्द्र शर्मा हिंदी ‘डायस्पोरा’ लेखन का सबसे जाना-पहचाना नाम है. इसमें कोई संदेह नहीं कि उन्होंने आप्रवासी हिंदी कहानी को एक नई ज़मीन दी, नई पहचान दी. हाल में ही उनका नया कहानी संग्रह आया है ‘कब्र का मुनाफा’. प्रस्तुत है उसी संग्रह से एक कहानी- जानकी पुल.  ————————————————– जिल …

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प्यारा सुभाष, नेता सुभाष, भारत भू का उजियारा था

आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्मतिथि है. अनेक कवियों ने उनके ऊपर कविताएँ लिखी थी. उनकी स्मृतिस्वरूप प्रस्तुत है एक प्रसिद्ध कविता. कवि हैं गोपाल प्रसाद व्यास- जानकी पुल. है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं।है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्वत झुक जाया करते …

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साहित्य का सबसे बड़ा महोत्सव या सबसे बड़ा कार्निवाल

कुछ उसे एशिया का, कुछ दुनिया का सबसे ‘बड़ा’ साहित्योत्सव बताते हैं, कुछ महज एक ‘कार्निवाल’. गुलाबी शहर जयपुर में हलकी ठंढ की खुमारी में वहां की संस्कृति के प्रतीक एक महल(दिग्गी पैलेस) में आयोजित होने वाले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ग्लैमर, मीडिया, राजनीति और साहित्य के ‘मिक्स’ से एक ऐसा …

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यह एक ऐसी पटकथा थी जिसका क्लाइमेक्स पहले ही लिखा जा चुका था

सब कुछ किसी ऐसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म की पटकथा की तरह था जिसका क्लाइमेक्स जैसे पहले ही लिखा जा चुका था. भारतीय अंग्रेजी साहित्य के सबसे विवादित और चर्चित ‘ब्रांड’ सलमान रुश्दी के जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में नहीं आने का अंदेशा कुछ-कुछ मीडिया वालों को भी उसी दिन से था जिस …

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तुम्हारे प्रेम में हूँ, कुछ सबूत मिले हैं मुझे

आज वंदना शर्मा की कविताएँ उनके वक्तव्य के साथ. वंदना शर्मा की कविताओं ने इधर कविता-प्रेमियों का ध्यान अपनी सादगी, बयान की तीव्रता और अनुभव की गहराई से आकर्षित किया है- जानकी पुल.  मैं बहुत सामान्य सी स्त्री हूँ, कुछ भी सिर्फ मेरा नही.. न अनुभूति न कविता, कविता मेरे …

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