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लेखक की खामोशी का कोई ठोस मतलब होना चाहिए

पेरू के लेखक मारियो वर्गास योसा इस समय दुनिया के सबसे महान जीवित लेखकों में गिने जाते हैं. उन्होंने पत्र-शैली में उपन्यासों पर एक पुस्तक लिखी थी- ‘the letters to a young novelist’. उसके कुछ अंशों का युवा लेखक श्रीकांत दुबे ने मूल स्पैनिश से से अनुवाद किया है. यहां …

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समुद्र का जहाँ मिलन होता है चांद में घुली धरती से

नीता गुप्ता यात्रा बुक्स की प्रकाशक ही नहीं हैं बेहद संवेदनशील लेखिका भी हैं. इस यात्रा संस्मरण को ही देखिये. बिना अधिक वर्णनात्मकता के कितनी सहजता से वे हमें अपनी यात्रा में शामिल कर लेती हैं. कुछ यात्राएं मन की भी होती हैं. डोवर से कैले तक की यात्रा भी …

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काशी को कबीर का संस्कार मिला है

२०११ के साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता काशीनाथ सिंह से आज कवयित्री आभा बोधिसत्व की बातचीत- जानकी पुल. आप को साहित्य आकादमी पुरस्कार मिला है आपके उपन्यास ‘रेहन पर रग्घू’को, लेकिन क्या यह आप की प्रिय रचना भी है? नही मेरी प्रिय रचना तो ‘काशी का अस्सी’ है,ऐसे ‘रेहन पर रग्घू’को …

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अमावस्या से पूर्णमासी तक

युवा कवि रविकांत को हेमंत स्मृति सम्मान मिला है. रविकांत की कविताएँ हिंदी कविता के बदलते  स्वर से परिचय करवाती है. एक ऐसे मुहावरे से जिसमें आज के मनुष्य की आवाज़ सुनाई देती है. उनको बधाई के साथ प्रस्तुत हैं उनकी कुछ चुनी हुई कविताएँ- जानकी पुल.  1. बयान इसमें …

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कहानी सुनने सुनाने की चीज है पढऩे और पढ़ाने की नही

कल काशीनाथ सिंहको ‘रेहन पर रग्घू’ उपन्यास पर साहित्य अकादेमीपुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई. उनको जानकी पुल की ओर से बहुत बधाई. इस मौके पर पेश है उनसे एक बातचीत. हम युवा आलोचक पल्लव के आभारी हैं कि उन्होंने तत्परता से यह बातचीत हमें उपलब्ध करवाई. रामकली सर्राफ : …

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उन दिनों बेखौफ चलने की आदत थी

आज वर्तिका नंदा की कविताएँ. वर्तिका नंदा हिंदी टेलीविजन पत्रकारिता का जाना-माना नाम है, लेकिन वह एक संवेदनशील कवयित्री भी हैं. स्त्री-मन उनकी कविताओं में कभी सवाल की तरह प्रकट होता है, कभी उनमें अनुभव के बीहड़ प्रकट होते हैं. उनका अपना मुहावरा है, अपनी आवाज़- जानकी पुल.  कुछ जिंदगियां …

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मैं उसकी था पसंद तो क्यों छोड़ के गया

कल ‘समन्वय’ में उर्दू-शायर शीन काफ निजाम ने समां बंध दिया. उनको सुनना बहुत जीवंत अनुभव रहा. शायरी पर उन्होंने काफी विचारोत्तेजक बातें भी कीं. उनकी कुछ चुनिंदा ग़ज़लें हम पेश कर रहे हैं- जानकी पुल. १. आँखों में रात ख्वाब का खंज़र उतर गया यानी सहर से पहले चिरागे-सहर …

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भीड़, जनसमुदाय और राजनीति अन्‍ना के बहाने

युवा इतिहासकार सदन झा हर चीज़ में कुछ नया, कुछ अलग देखते हैं. हमारे देखे हुए को, सुने हुए को एक लग अंदाज़ में दिखाते-सुनाते हैं. लोककथाओं की शैली में गहरी विद्वत्ता झलकती है. अब भीड़ के बहाने यही लेख देखिये- जानकी पुल.  अरे रे राष्ट्रियश्‍यालक! एह्येहि स्‍वस्‍याविनयस्‍य फलमनुभव। (तत: …

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भारतीय अंग्रेजी साहित्य का तीसमारखां

अपनी प्रेमिकाओं, शादियों, तलाक और विवादस्पद बयानों के लिए लगातार चर्चा में रहने वाले सलमान रुश्दी ने ३० साल पहले एक उपन्यास लिखा था ‘मिडनाईटस चिल्ड्रेन’, जिसने भारतीय अंग्रेजी साहित्य का परिदृश्य ही बदल दिया था. अब उस उपन्यास पर दीपा मेहता की फिल्म आने वाली है. ३० सालों में उस …

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वह गाँधी के पीछे-पीछे गया कुछ दूर

कल मेरे प्रिय कवि बोधिसत्व का जन्मदिन है. बोधिसत्व की कविताओं में वह दिखाई देता है, सुनाई देता है जो अक्सर दृश्य से ओझल लगता है. गहरी राजनीतिक समझ वाले इस कवि की कविताओं वह कविताई भी भरपूर है जिसे रघुवीर सहाय सांसों की लय कहते थे. उनकी नई कविताएँ …

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