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मंच के हंस : बलबीर सिंह रंग

हिंदी की मंचीय कविता को लोकप्रिय बनाने वाले कवियों में बलवीर सिंह रंग का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. ‘रंग का रंग ज़माने ने बहुत देखा है/ क्या कभी आपने बलवीर से बातें की हैं’ जैसे गीत लिखने वाले इस कवि की यह जन्मशताब्दी का साल है. इस अवसर …

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मुंबई की अँधेरी दुनिया और ‘सेक्रेड गेम्स’

विक्रम चंद्रा भारतीय-अंग्रेजी लेखन के ‘बूम’ के दौर के लेखक हैं. १९९५ में जब उनका उपन्यास ‘रेड अर्थ पोरिंग रेन’ प्रकाशित हुआ था तो उसने उनको अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलवाई. अरुंधति रे से पहले के दौर के भारतीय अंग्रेजी लेखकों में उनको सबसे संभावनाशील लेखकों में माना जाता था. बाद में …

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क्या यही भविष्य है भारत का ?

आज युवा कवि त्रिपुरारि कुमार शर्मा की कविताएँ- ‘मृत्यु’ जिसका अर्थ मैंने बाबूजी से पूछा था जाने कहाँ चले गये बिना उत्तर दिये शायद खेतों की ओर नहीं, स्कूल गये होंगे आज सात साल, तीन महीना और बीसवाँ दिन भी बीत गया लौट कर नहीं आये क्या मृत्यु इसी को …

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वो गुज़रा ज़माना: स्टीफन स्वाइग

कुछ बरस पहले ऑस्ट्रियन लेखक स्टीफेन स्वाइग की आत्मकथा का हिंदी अनुवाद आया था तो उसकी खूब चर्चा रही. अनुवाद किया था हमारे प्रिय कथाकार ओम शर्मा ने. पुस्तक का एक अंश ओमा जी की भूमिका के साथ- जानकी पुल. अनुवादक का कथ्य हमारे समकालीन साहित्य में स्टीफन स्वाइग बहुत …

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आज शैलेश मटियानी की पुण्यतिथि है

आज हिंदी के उपेक्षित लेकिन विलक्षण लेखक शैलेश मटियानी की पुण्यतिथि है. उन्होंने अपने लेखन के आरंभिक वर्षो मे ‘कविताएं’ भी लिखी थीं. आज उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी कुछ कविताएं यहां दी जा रही हैं, जिन्हें उपलब्ध करवाने के लिए हम दिलनवाज़ जी के आभारी हैं- जानकी पुल. नया …

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मिथकों में बदल रही हैं सारी अच्छाइयां

रवि बुले समकालीन हिंदी कहानी का जाना-पहचाना नाम है. भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित उनका कथा-संग्रह ‘आईने सपने और वसंतसेना’ पर्याप्त चर्चा भी बटोर चुका है. यह कम ही लोग जानते हों कि वे एक संवेदनशील कवि भी हैं. आज उनकी चार कविताओं को पढते हैं- जानकी पुल. खोजो खोजो दुनिया …

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अबरार अल्वी के गुरुदत्त और ‘प्यासा’ की कहानी

हिंदी सिनेमा के प्रयोगधर्मी निर्देशक और खब्बू अभिनेता गुरुदत्त ने अपने साथ एक जमात तैयार की। वहीदा रहमान, कैमरामैन वी.के. मूर्ति, एस. डी. बर्मन जॉनी वाकर, महमूद, अबरार अलवी, राज खोसला सहित कई ऐसे नाम हैं, जिन्होंने ‘गुरुदत्त फिल्म्स’ के साथ जुड़ अपनी-अपनी हुनरमंदी और नेक शख्सियत के दम पर …

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यह जाते हुए चैत्र की शाम है

आज आलोक श्रीवास्तव की कविताएँ. ‘वेरा उन सपनों की कथा कहो’ नामक अपने पहले ही संग्रह से खास पहचान बनाने वाले इस कवि का नया संग्रह हाल में ही आया है ‘दिखना तुम सांझ तारे को’. प्रस्तुत हैं उसी संग्रह की कुछ चुनी हुई कविताएँ- जानकी पुल. 1 तुम्हारे वसंत …

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सभ्यता की सुबह में इतिहास की सैर

वरिष्ठ संपादक-लेखक ओम थानवी ने ‘मुअनजोदड़ो’ लिखी भले यात्रा-वृतांत की शैली में है लेकिन पुस्तक में एक इतिहासकार-सी सजगता भी है, पुरात्वेत्ता-सी बारीकी भी और एक कलाकार की कल्पनाशीलता भी. लेखक-कवि-पत्रकार प्रियदर्शन का यह लेख इसी पुस्तक को समझने-समझाने का एक सुन्दर प्रयास है- जानकी पुल. ओम थानवी की ख्याति …

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सुनो यह बारिश के बादलों की गर्जन नहीं है

मूलतः इंजीनियरिंग के छात्र आस्तीक वाजपेयी की ये कविताएँ जब मैंने पढ़ी तो आपसे साझा करने से खुद को रोक नहीं पाया. इनके बारे में मैं अधिक क्या कहूँ ये कविताएँ अपने आपमें बहुत कुछ कहती हैं- इतिहास, वर्तमान, जीवन, मरण- कवि की प्रश्नाकुलता के दायरे में सब कुछ है …

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