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या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता!

विजयादशमी के बहाने एक लेख लिखा है- प्रभात रंजन  ===================================== ब्रिटिश लेखिका एलिस एल्बिनिया ने कुछ साल पहले महाभारत की कथा को आधुनिक सन्दर्भ देते हुए एक उपन्यास लिखा था ‘द लीलाज बुक’, इसमें समकालीन जीवन सन्दर्भों में संस्कृति-परम्परा की छवियों को देखने की एक मजेदार कोशिश की गई है. …

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तुम्हारी लिखी हमारी प्रेम कविता डिलीट हो गई

1    तकनीक, आभासी दुनिया ने हमारे संबंधों के संसार को बदल कर रख दिया है. प्रेम का एक नया संसार है. इन कविताओं में अभिव्यक्त अनुभव इसी नए संसार के माध्यम से है. यशस्विनी पांडे की कविताएं जब मेल पर मिली तो सबसे पहले उन कविताओं के अनुभव संसार …

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क्या साहित्य अकादेमी अध्यक्ष को शर्म आती है?

ऐसा लग रहा है लेखकों ने अपने सारे दाग धो दिए हैं, मैं हिंदी-लेखकों की बात कर रहा हूँ. जिस भाषा के लेखक देश में हर आतातायी दौर में गुम्मी-सुम्मी ओढ़े रहे वे आज प्रतिरोध के सबसे बड़े प्रतीक बने हुए हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि प्रतिरोध की …

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रवीन्द्र जैन की ग़ज़लें

जाने -माने गीतकार, संगीतकार रवीन्द्र जैन अच्छे कवि थे. हाल में ही उनका देहांत हुआ तो उनकी कविताओं की किताब ‘दिल की नज़र से’ की याद आई. उसकी कुछ चुनिन्दा ग़ज़लें आपके लिए- मॉडरेटर  =========================================== 1. तमाम रिश्तों से नातों से कट गया हूँ मैं, निकल के दुनिया से खुद …

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असगर वजाहत का कैम्पस कनेक्शन!

असगर वजाहत हमारे दौर के सबसे जीवंत किस्सागो हैं. उनके लिखे उपन्यास हों, कहानियां हों या गद्य की किसी और विधा का लेखन हो उनमें वाचिक परम्परा का वैभव दिखाई देता है. उनको पढने, सुनने की लत पड़ जाती है. पाठकों को अगर एक साथ उनकी तीन किताबें पढने को …

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अकादेमी अध्यक्ष की गुगली- सुधीश पचौरी

आज ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में सुधीश पचौरी जी का धारदार व्यंग्य.  =========================================== मैं अकादमी के अध्यक्ष जी की प्रतिभा का अब जाकर कायल हुआ हूं- उन्होंने अकादमी के पक्ष में अंगद की तरह पांव जमा दिए हैं। कह दिया है कि अकादमी के नाम पर लेखकों को विरोध की अवसरवादी कबड्डी …

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तीसरा शैलप्रिया स्मृति सम्मान अनीता रश्मि को

पिछले साल शैलप्रिया स्मृति सम्मान लेखिका नीलेश रघुवंशी को दिया गया था. इस बार अनीता रश्मि को देने का निर्णय किया गया है. यह सम्मान अलग ढंग का सम्मान है जो लेखिकाओं को हर साल सम्मानित करता है. शैलप्रिया जी स्वयं बहुत संवेदनशील लेखिका थी. यह सम्मान उनके प्रति सच्ची …

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अल्पसंख्यक होना लगभग अपराधी होना बन गया है- अशोक वाजपेयी

अशोक वाजपेयी अपनी जनतांत्रिकता के लिए जाने जाते रहे हैं. देश की जनतांत्रिक परम्पराओं पर जब भी संकट के बादल मंडराए हैं उन्होंने आगे बढ़कर उका प्रतिकार किया. 2002 में हुए गुजरात दंगों के समय उन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए खुलकर सरकार का विरोध किया था और प्रतिरोध की …

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भरत तिवारी ‘फैजाबादी’ की ग़ज़लें

भरत तिवारी ‘फैजाबादी’ आजकल अच्छी ग़ज़लें कहने लगे हैं. समय की विडंबनाएँ जैसे उनके शेरों में उतर रही हैं. चालू बहरों से हटकर कुछ संजीदा, कुछ तंजिया शायरी से लुत्फ़अन्दोज़ होइए- मॉडरेटर ==================================================== 1.  वो जो हैं खुद ही बड़बोले उनकी तो बातें रहने दो दम्भ उन्हें है ताज़ा – …

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दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राएं और ‘पिंजरा तोड़’ अभियान की पाती

‘पिंजरा तोड़‘ दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों की छात्राओं द्वारा स्वतंत्र रूप से चलाया जा रहा अभियान है। यह महिला छात्रावासों व पीजी में लागू भेदभावपूर्ण  व असम्मानजनक नियमों के अंत की मांग करता है जिससे छात्राएं  भी विश्वविद्यालयों ओर पूरे शहर के संसाधनों का बराबर लाभ  उठा सकें। यह महिला सुरक्षा की ऐसी परिभाषा …

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