Home / ब्लॉग (page 39)

ब्लॉग

जेड प्लस इंटेलेक्चुअल फिल्म नहीं, इंटेलिजेंट फिल्म है!

यह शाम की रिव्यू है. जो सुबह से थोड़ी अलग है और कुछ कुछ उस जैसी भी है. जेड प्लस फिल्म ही ऐसी है कि हर लेखक का अपना अपना पाठ तैयार है. यह पाठ है प्रसिद्ध युवा लेखिका अनु सिंह चौधरी का. असल में करोड़ करोड़ खेलने वाली फिल्मों …

Read More »

शीन काफ निजाम की ग़ज़लें

लोकमत समाचार के वार्षिक आयोजन ‘दीप भव’ में वैसे तो सभी रचनाएँ अपने आप में ख़ास हैं. लेकिन पहले शीन काफ निजाम साहब की ग़ज़लें पढ़िए, जो इस अंक की एक नायाब पेशकश है- मॉडरेटर  1. सफ़र में भी सहूलत चाहती है मुहब्बत अब मुरव्वत चाहती है तुम्हारा शौक है, …

Read More »

सिनेमा में करुण रस क्या होता है?

युवा लेखक प्रचण्ड प्रवीर इन दिनों रस सिद्धांत के आधार पर विश्व सिनेमा के अध्ययन में लगे हैं. उनका यह लेख इस बात को लेकर है कि करुण रस दुनिया भर की फिल्मों में किस तरह अभिव्यक्त हुआ है. अंतर्पाठीयता का एक बेजोड़ उदाहरण- मॉडरेटर. ====================================== इस लेखमाला में अब …

Read More »

प्रताप सोमवंशी की चार कविताएं

प्रताप सोमवंशी को हम सजग वरिष्ठ पत्रकार के रूप में अच्छी तरह जानते हैं. वे एक संवेदनशील कवि भी हैं. कविता उनके सार्वजनिक के निजी एकांत की तरह हैं. यहाँ प्रस्तुत हैं उनकी चार कविताएं- मॉडरेटर  ============ १- क्या नहीं है इस आंगन में —- चिड़ियों ने जाने कैसे कहां …

Read More »

डीयू का बिहार कनेक्शन और अंग्रेजी उपन्यास

लोकप्रिय अंग्रेजी उपन्यासों का यह साल दिल्ली विश्वविद्यालय के नाम रहा. दिल्ली विश्वविद्यालय का बिहार कनेक्शन इस साल अंग्रेजी के लोकप्रिय उपन्यासों का सबसे कारगर मुहावरा रहा. रविंदर सिंह का उपन्यास ‘Your Dreams are Mine Now’(हिंदी अनुवाद: तुम्हारे सपने हुए अपने) इस श्रृंखला की आखिरी कड़ी है. सबसे पहले आया …

Read More »

रणदीप और नंदना की अधिक रवि वर्मा की कम बनी ‘रंगरसिया’

100 करोड़ के टारगेट की वजह से आजकल ऐसी फ़िल्में कम आ पाती हैं जिनमें कंटेंट के स्तर पर कुछ कहने सुनने को हो. ‘रंगरसिया’ एक अलग फिल्म फिल्म साबित हुई. जब से आई है चर्चा में बनी हुई है. रंजीत देसाई के उपन्यास पर बनी केतन मेहता की इस …

Read More »

क्या है जर्मन-संस्कृत विवाद?

केन्द्रीय सेवाओं में हिंदी के उचित महत्व के मुद्दे पर प्रेमपाल शर्मा के तर्कों के हम सब कायल रहे हैं. केन्द्रीय विद्यालयों में जब जर्मन भाषा के स्थान पर संस्कृत पढ़ाने का मसला आया तो यह जरूरी लगा कि त्रिभाषा फ़ॉर्मूला और विदेशी भाषाओं के सन्दर्भ को समझा जाए. देखिये, …

Read More »

मनीषा पांडे की पांच कविताएं

कहते हैं कविता अभिव्यक्ति का विशुद्ध रूप होता है- भावना और बुद्धि के सबसे करीब. मनीषा पांडे की कविताओं को पढ़ते हुए ऐसा लगा जैसे हम किसी और लेखिका को पढ़ रहे हैं, उस मनीषा पाण्डे को नहीं जिसके लेखन के तेवर से हम सब परिचित रहे हैं. ऐसे समय …

Read More »

कुमार विश्वास क्यों मेरे दिल के बहुत करीब है?

मैं हिंदी का कैसा लेखक हूँ यह आप जानें. मुझे अपने लेखन को लेकर कोई मुगालता नहीं है. लेकिन ‘पाखी’ पत्रिका में कुमार विश्वास के साक्षात्कार के प्रकाशन के नजरिये और उनके साक्षात्कार के प्रकाशन के बाद जिस तरह हम खुद को गंभीर लेखक साबित करने के लिए कुमार के …

Read More »

राजकमल चौधरी का पत्र दूधनाथ सिंह के नाम

लेखकों के पत्रों से कई बार उनके व्यक्तित्व का, उनके लेखन-सूत्रों का पता चलता है. यह एक ऐतिहासिक पत्र है जो आमुख-8 में प्रकाशित हुआ था. राजकमल चौधरी ने संभवतः अपने मरने से कुछ दिनों पहले दूधनाथ सिंह को लिखा था. कल से इस पत्र को लेकर इलाहबाद विश्वविद्यालय के …

Read More »