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गीताश्री की नई कहानी ‘दमिश्क की भूलभुलैया और अलादीन का चिराग’

गीताश्री मेरी बड़ी बहन हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके लिखे को भी मैं उसी तरह से देखता हूँ. बल्कि उनकी कई चर्चित कहानियों का मैं घनघोर आलोचक रहा हूँ. बहरहाल, जो बात उनकी कहानियों के सन्दर्भ में रेखांकित किये जाने के लायक है वह यह है …

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देशभक्ति के दौर में ‘देश’ से जुड़ा ‘देस’ का किस्सा

आजकल अजब माहौल है. लोग बात बात में ‘देश’ की बात करने लगते हैं. कहने लगते हैं देश से बड़ा कुछ नहीं होता. एक बार ऐसे ही मेरे अपने ‘देस’ के नंदन ठाकुर के ऊपर यह धुन सवार हो गई थी कि वे दिल्ली जायेंगे देश को देखेंगे.  अपनी ही …

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कक्का जेपी बनकर क्रांति करेंगे!

नॉर्वे प्रवासी मिथिलावासी डॉक्टर व्यंग्यकार प्रवीण कुमार झा के ‘कक्का’ इस बार क्रांति के मूड में लौट आए हैं. पढ़िए- मॉडरेटर  =================== सुबह उठा तो बर्फ की चद्दर बिछी पड़ी थी। पूरी रात बस बर्फ गिरती रही शायद। पहाड़ों में जैसे जान आ गई। यह मनोरम दृश्य निहार रहा था …

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अलका सरावगी के नए उपन्यास का अंश

अलका सरावगी मेरी सबसे प्रिय लेखिकाओं में हैं. उनका हर उपन्यास जीवन को, समाज को समझने की एक नई खिड़की खोलता है. हर बात वही चिर परिचित किस्सागोई, वही कोलकाता लेकिन लेकिन एक नई छवि. समकालीन लेखकों में ऐसा किस्सागो दूसरा नहीं. फिलहाल उनके नए उपन्यास का अंश. अंश से …

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पिंक फ्लॉयड, द गनर्स ड्रीम और स्वप्निल का अनुवाद

आज कल सेना, सैनिक, शहादत की बड़ी चर्चा है. लेकिन क्या कोई यह सोचता है सैनिक मन में क्या चाहता है? महान ब्रिटिश बैंड पिंक फ्लॉयड का गाया एक मशहूर गीत है ‘द गनर्स ड्रीम’. उस गीत का बहुत सुन्दर अनुवाद स्वप्निलकान्त दीक्षित ने किया है. स्वप्निल ने अभी कुछ दिन …

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एजाज अहमद: पश्चिम की‘थ्योरी’ और तीसरी दुनिया का साहित्य

एजाज अहमद का नाम 90 के दशक में थ्योरी, आलोचना के सन्दर्भ में खूब लिया जाता था. आजकल गंभीर विमर्शों, आलोचना से नई पीढ़ी विमुख हो रही है. लेकिन वैभव सिंह का लेखन इसका अपवाद है. वे लगातार गंभीर लेखाकं कर रहे हैं और हिंदी आलोचना को समृद्ध कर रहे …

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उपासना झा की कहानी ‘महुआ घटवारिन’

उपासना झा ने हाल के दिनों में कविता, अनुवाद जैसे क्षेत्रों में अपनी जबर्दस्त रचनात्मक पहचान दर्ज करवाई है. आज उनकी नई कहानी ‘महुआ घटवारिन’- मॉडरेटर  ====================================== दूरी रे गबनमा से ऐलनी सुंदर दूल्हा,ऐलनी सुन्दर दूल्हा…द्वार पीछे भय गेलनि ठार रे गबनमा… ये गीत उसने अभी अपनी सहेली के ब्याह …

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खदेरू की चिंगचांग और जुब्बा ख़ाला के चीनी बर्तन

चीनी सामानों के बहिष्कार की देशभक्ति का दौर है, दीवाली आ गई है मन मेन ऊहापोह है बिजली के चीनी झालर लगाएँ या न लगाएँ, न लगाएँ तो क्या लगाएँ? इसी ऊहापोह के दौर में बहुत दिनों बाद सदफ़ नाज़ अपने नए व्यंग्य के साथ लौटी हैं। पढ़िये- मॉडरेटर  ================================ …

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हिंदी में एकांगी मीडिया मंथन

अरविंद दास ने जेएनयू से मीडिया पर पीएचडी कर रखी है। मेरे जानते हिन्दी में मीडिया पर जो गिनी चुनी शोधपूर्ण पुस्तकें हैं उनमें एक अरविंद दास की किताब भी है- हिंदी में समाचार। एक मीडिया संस्थान में काम भी करते हैं। बहरहाल, मीडिया और विज्ञापन को लेकर उनकी या …

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निर्मल को पढने से मन निर्मल हो जाता है

आज महान लेखक निर्मल वर्मा की पुण्यतिथि है. लेखिका दिव्या विजय ने उनके लिखे किरदारों को नाटक में जीने के अपने अनुभव के आधार पर लिखा है कि किस तरह निर्मल वर्मा के लिखे को महसूस किया जा सकता था. हिंदी के उस विश्वस्तरीय लेखक को श्रद्धांजलि- मॉडरेटर  ========================================================= निर्मल …

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