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शाज़ी ज़माँ का ‘अकबर’

अकबर भारतीय इतिहास के सबसे बड़े नायकों में एक हैं. उनके ऊपर पहला उपन्यास आ रहा है- ‘अकबर‘. लिखा है शाज़ी ज़माँ ने. प्रकाशक है राजकमल प्रकाशन. आज जानकी पुल के पाठकों के लिए उसका एक अंश- मॉडरेटर यह उपन्यास  लेखक ने कल्पना के बूते पर नहीं, बाज़ार से दरबार तक …

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धोनी के मौन सन्यास पर फिल्म भी मौन है!

धोनी कई बार पॉल कोएलो के उपन्यास ‘अलकेमिस्ट’ के नायक की तरह लगता है, जिसने सपने देखे और उनको हकीकत में बदल दिया। “एमएस धोनी-अनटोल्ड स्टोरी” उसी नायक की कहानी है। नीरज पांडे के इस बायोपिक पर आज नवल किशोर व्यास का लेख- मॉडरेटर  =================================================== धोनी पर बनी फिल्म देखनी …

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असाधारण खिलाड़ी को महानायक बनाने वाली फिल्म

धोनी अकेले क्रिकेट खिलाड़ी हैं जो बायोपिक के साथ खेल से विदाई लेंगे। उनका जीवन, उनका कैरियर किसी पुरा-नायक जैसा बनाता है उनको। नीरज पांडे ने उनके ऊपर कमाल की फिल्म बनाई है- ms dhoni-untold story, जिसे सुशांत सिंह राजपूत ने अपने अभिनय से यादगार बना दिया है। इस फिल्म पर सैयद …

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साढ़े तीन कविता, सीपियों वाला पेंसिल बॉक्स और पीले पेपर के डिज़ाइन

हिंदी में किशोरों के जीवन, उनकी शिक्षा, उससे जुड़े तनावों को लेकर कम कहानी लिखी गई है. प्रबुद्ध जैन की यह कहानी उसी तरह की है- मॉडरेटर  =============================== बात साल 2007 की है। अंशुल फ़िफ़्थ में रहा होगा। मां–बाप यानी किशोर और नम्रता बेटे का हाथ थामे ‘तारे ज़मीं पर‘ …

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निर्मल वर्मा की कहानी ‘धूप का एक टुकड़ा’

पिछले दिनों निर्मल वर्मा पर एक बहस में अर्चना वर्मा मैम ने यह बात कही ही कि समकालीन जीवन से सबसे ज्यादा निर्मल वर्मा की कहानियां कनेक्ट करती हैं. इस कहानी को पढ़िए तो पता चलेगा कि अकारण नहीं है कि निर्मल वर्मा आज बहुत प्रासंगिक लेखक लगने लगे हैं- …

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पुरूष अहेरी है, नारी शिकार!

शर्मिला बोहरा जालान जो भी लिखती हैं उसको एक ठोस वैचारिक जमीन देने की कोशिश करती हैं. यह समकालीन लेखिकाओं में विरल तत्त्व है जो उनके लेखन में प्रबल है. बहरहाल, फिल्म ‘पिंक’ देखने के बाद और उसके हो-हल्ले के थम जाने के बाद उन्होंने उससे उठने वाले कुछ सवालों …

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हुमैरा राहत की ग़ज़लें

हुमैरा राहत के शेर पढता रहता था. अभी हाल में ही उनकी गजलों और नज्मों का संकलन हाथ में आया- पांचवीं हिजरत. किताब राजपाल एंड संज प्रकाशन से आई है. उसी से कुछ ग़ज़लें- मॉडरेटर  =============================================================== 1. बिछुड़ते वक्त भी रोया नहीं है ये दिल अब नासमझ बच्चा नहीं है …

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प्रवीण कुमार झा का व्यंग्य ‘मिक्स्ड डबल’

पिछले दिनों युवा लेखक प्रवीण कुमार झा की किताब आई ‘चमनलाल की डायरी’. इस पर लेखक का नाम वामा गांधी है. वे इसी नाम से शायद ब्लॉग लिखा करते थे. बहरहाल, यह किताब अपने आप में सेल्फ पब्लिशिंग का अच्छा उदाहरण है. बिना किसी प्रचार-प्रसार के महज पाठकों और दोस्तों …

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देव आनंद के ऊपर दिलीप कुमार

दिलीप कुमार और देव आनंद समकालीन अभिनेता ही नहीं थे अच्छे दोस्त भी थे. देव साहब के निधन पर दिलीप कुमार ने यह लिखा था. कल देव आनंद का जन्मदिन था तो सैयद एस. तौहीद ने इस लेख की याद दिलाई. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर  ====================== सिनेमा में दाखिल होने …

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हम केवल बातन के तेज़

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रंजन कुमार सिंह ने भारत-पाकिस्तान तनाव के सन्दर्भ में प्रधानमंत्री के हाल के भाषण के ऊपर बहुत विचारोत्तेजक लेख लिखा है- मॉडरेटर  ======================================== एक थे पहलवानजी। नई-नई शादी हुई थी। सुहागरात पर उन्होंने अपनी पत्नी से बड़े ही प्यार से पूछा- पंजा लड़ाएगी? पूरा देश जब …

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