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औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाज़ार दिया

साहिर लुधियानवी का लिखा हुआ यह गीत यूँ तो 1958 में रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘साधना’ के लिए इस्तेमाल किया गया था। लेकिन ज़रा ग़ौर से सोचें तो समझ में आता है संदर्भ भले ही बदल गया हो, औरतों के प्रति ज़्यादातर मर्दों की सोच वहींं ठहरी हुई है। यही वजह …

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क्या होता अगर वह स्त्री न होकर पुरुष होती?

एक तरफ स्त्री आजादी की बात की जाती है दूसरी तरफ यह है कि आज भी कोई औरत अगर बोलती है तो पुरुष समाज उसको उसकी जगह बताने में लग जाता है. दिव्या विजय का एक लेख इस विषय पर- मॉडरेटर =============================================== क्या होता अगर वह स्त्री न होकर पुरुष …

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नज़ीर बनारसी की नज़्म ‘फ़िरक़ापरस्ती का चैलेन्ज’

आज के माहौल में नजीर बनारसी का यह कलाम याद आ गया- मॉडरेटर =================================== ताक़त हो किसी में तो मिटाए मिरी हस्ती डाइन है मिरा नाम लक़ब फ़िरक़ा-परस्ती मैं ने बड़ी चालाकी से इक काम किया है पहले ही मोहब्बत का गला घूँट दिया है मैं फ़ित्ने उठा देती हूँ …

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‘रंगून’ फिल्म नहीं एक अतुकांत कविता है

सोशल मीडिया के वर्चस्व के इस दौर में हम जजमेंटल होने की जल्दबाजी में रहते हैं. एक वाक्य में फैसला सुनाकर अगले फैसले की तरफ बढ़ जाते हैं. ‘रंगून’ फिल्म के साथ यही हुआ है. उस फिल्म की आज एक और डिफरेंट रीडिंग दिव्या विजय ने की है- मॉडरेटर ============ …

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देशप्रेम ब्लडी हेल! ‘रंगून’ में प्रेम है प्रेम!

‘रंगून’ फिल्म जब से आई है तब से उसको लेकर कई तरह की व्याख्याएं हो रही हैं. आज मुश्किल यह हो गई है अच्छी या बुरी के इर्द गिर्द ही फिल्मों की सारी व्याख्या सिमट कर रह जाती है. उसके बारे में अलग-अलग पहलुओं को लेकर चर्चा कम ही होती …

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दुनिया के पहले डोर टू डोर कवि के बारे में

आज ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ अखबार में महेंद्र राजा जैन का लिखा एक दिलचस्प लेख पढ़ा. लेख रोवान मेकाबे के बारे में था. वह कविताओं की होम डेलिवरी करता है. उसके बाद रोवान की वेबसाईट https://rowanthepoet.com पर गया. वह खुद को दुनिया का पहला door to door poet कहता है. अजनबी लोगों के …

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मृणाल पाण्डे का अथ वणिक रत्नसेन प्रबंध-4

यह जानकी पुल के लिए गौरव की बात है कि प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे एक कथा-श्रृंखला लिख रही हैं जो सबसे पहले जानकी पुल के पाठकों के लिए सामने आ रहा है. प्राचीन कथाओं के शिल्प में आधुनिक जीवन की गुत्थियाँ बहुत रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत कर रही हैं. आज …

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फ़िल्म डायरेक्टर विशाल भारद्वाज की कविता

विशाल भारद्वाज निर्देशित फ़िल्म ‘रंगून’ हाल में रिलीज़ हुई और बहुत चर्चा में है। जानकीपुल पर भी कई रिव्यू पढ़ा जा चुका है। लेकिन कम लोग जानते हैं कि विशाल कविताएँ भी लिखते हैं। जल्द ही उनकी कविताओं का संग्रह हमारे बीच होगा। फ़िलहाल पढ़ते हैं विशाल भारद्वाज की कविता, …

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शम्भुनाथ सिंह का गीत ‘मुझको क्या क्या नहीं मिला’

नई कविता की तर्ज़ पर नवगीत आन्दोलन चला था. जिसके सूत्रधार थे शम्भुनाथ सिंह. इन्होने तीन खण्डों में नवगीत दशक का संपादन किया था. आज की पीढ़ी नहीं जानती लेकिन शम्भुनाथ सिंह ने हिंदी में गीतों को रुमान से मुक्त करके एक नया रंग दिया था. उनका ही एक गीत- …

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प्रेम की नहीं देशप्रेम की फिल्म है ‘रंगून’

सिनेमा पर लिखता नहीं हूँ लेकिन रिव्यू पढ़कर सिनेमा देखता जरूर हूँ. ‘रंगून’ देखने के बाद यह महसूस हुआ कि रिव्यू पढ़कर कई बार सिनेमा देखने पर यह बुझाता है कि जो लिखा गया था वह तो फिल्म में है ही नहीं. ‘इन्डियन एक्सप्रेस’ समेत सभी बड़े अखबारों ने फिल्म की बड़ी …

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