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गीत चतुर्वेदी: नया संग्रह नई कविताएँ

इस साल पुस्तक मेले में एक बहु प्रतीक्षित कविता संग्रह भी आया. गीत चतुर्वेदी का संग्रह ‘न्यूनतम मैं’. गीत समकालीन कविता के ऐसे कवियों में हैं जिनकी हर काव्य पंक्ति में कुछ विशेष होता है. निस्संदेह इस बड़बोले समय में गीत की कविताएँ बेआवाज में दिल में आकर घर कर …

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युवा शायर #2 पूजा भाटिया की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में, आज पेश है पूजा भाटिया की ग़ज़लें – त्रिपुरारि 1. यूँ ही चलते रहने से भी क्या होगा अपना कहने को बस इक रस्ता होगा सहरा, जंगल, दश्त न वीराना कोई दीवाने का घर जाने कैसा होगा तुम भी दरिया को दरिया बन कर देखो तुम …

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‘सपने में पिया पानी’ की कुछ कविताएँ: समर्थ वशिष्ठ की कविताएँ

राजकमल प्रकाशन से इस साल कई युवा कवियों के संकलन आए हैं. इनमें एक अलग तरह का कवि समर्थ वशिष्ठ है. उनकी कविताओं का संग्रह है ‘सपने में पिया पानी’. वे अंग्रेजी में भी कविताएँ लिखते हैं. हिंदी में यह उनका पहला कविता संकलन है. उसी संग्रह से बिना कुछ …

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बिहार में राहत वितरण की तर्ज पर पुरस्कार वितरण

बिहार सरकार द्वारा जब भी साहित्यिक आयोजन होते हैं, पुरस्कार-सम्मान दिए जाते हैं तो उनको बदइन्तजामी, गुटबाजी, बंदरबांट के लिए ही याद किया जाता है. इस बार भी बिहार सरकार द्वारा 30-31 मार्च को बिहार सरकार द्वारा राजभाषा हिंदी साहित्य समागम का आयोजन किया गया. जो अन्य कारणों से अधिक …

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वंदना राग की ‘रीगल स्टोरी’

रीगल सिनेमा बंद हो गया. हम सबके अंतस में न जाने कितनी यादों के निशाँ मिट गए. इसी सिनेमा हॉल के बाहर हम तीन दिन लाइन में लगे थे ‘माया मेमसाहब’ की टिकट के लिए. तब भी नहीं मिली थी. फिल्म फेस्टिवल चल रहा था. हम डीयू में पढने वालों …

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वैजयंतीमाला आई थी रीगल के आखिरी शो में ‘संगम’ देखने

युवा लेखक प्रचण्ड प्रवीर को रीगल के आखिरी शो में वैजयंती माला सिर्फ मिली ही नहीं बल्कि उनकी उनसे मुलाकात भी हुई. वह फिल्म की ही तरह सफ़ेद साड़ी पहने आई थी. पढ़िए बहुत दिलचस्प है सारा वाकया- मॉडरेटर =================================================== कल की बात – १६८ कल की बात है। जैसे …

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उस्ताद जाकिर हुसैन पर नसरीन मुन्नी कबीर की किताब

नसरीन मुन्नी कबीर किताबों की दुनिया की ‘कॉफ़ी विद करण’ हैं. फ़िल्मी-संगीत की दुनिया की हस्तियों से बातचीत के आधार पर किताब तैयार करती हैं. जावेद अख्तर, लता मंगेशकर पर उनकी किताबें खासी मकबूल हुई हैं. इस बार तबलानवाज़ जाकिर हुसैन के साथ उनकी किताब हार्पर कॉलिन्स प्रकाशन से आ …

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युवा शायर #1 सालिम सलीम की ग़ज़लें

जानकीपुल की नई पेशकश-युवा शायर। इस सीरीज के तहत उर्दू में लिखने वाले युवा शायर/शायरा की रचनाएँ प्रकाशित की जाएँगी। आप लुत्फ़ अंदोज़ हों। हौसला अफ़ज़ाई करें। आज पढ़ें पहला पोस्ट, सालिम सलीम की ग़ज़लें – त्रिपुरारि 1. कनार-ए-आब तिरे पैरहन बदलने का मिरी निगाह में मंज़र है शाम ढलने …

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मीना कुमारी के ‘आखिरी अढाई दिन’ की दास्तान

आज मीना कुमारी की बरसी है. मुझे याद आई मधुप शर्मा की किताब ‘आखिरी अढाई दिन’ की. मीना कुमारी के आखिरी दिनों को लेकर लिखे गए इस उपन्यास में आत्मकथा की शैली में मीना कुमारी अपनी कथा कहती हैं. कुछ कुछ रामकुमार वर्मा के एकांकी ‘औरंगजेब की आखिरी रात’ की …

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क्या ‘शतरंज के खिलाड़ी’ ने लखनऊ को बदनाम कर दिया?

प्रसिद्ध कवि-विचारक उदयन वाजपेयी के संपादन में निकलने वाली पत्रिका ‘समास’ में उर्दू के मशहूर लेखक शम्सुर्ररहमान फारुकी का इंटरव्यू आया है, जी उदयन जी ने खुद लिया है. उस इंटरव्यू से यह पता चलता है कि आजकल फारुकी साहब लखनऊ पर उपन्यास लिख रहे हैं. उस उपन्यास का एक …

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