Home / Featured (page 120)

Featured

Featured posts

हम सब भी इंसान रूप में कुछ-कुछ गधे ही हैं

सदन झा इतिहासकार हैं. आधुनिक इतिहास के गहरे अध्येता, सिम्बल्स को लेकर बहुत अच्छा काम कर चुके हैं. यूपी के गधा विमर्श में उन्होंने एक अलक्षित पहलू की तरफ ध्यान दिलाया है. पढने लायक- मॉडरेटर ============================================= हर दफे चुनाव कुछ नये शगूफे लेकर आता है। फिर, यूपी चुनाव की बड़ी …

Read More »

‘एक गधे की आत्मकथा’ के चुनिन्दा अंश

1950 के दशक के आखिरी वर्षों में उर्दू के मशहूर लेखक कृशन चंदर का उपन्यास आया था ‘एक गधे की आत्मकथा’. भारतीय लोकतंत्र पर बहुत बड़ा व्यंग्य था. उपन्यस में गधा प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु से भी मिलता है. कृशन चंदर ने अपनी आत्मकथा ‘आधे सफ़र की पूरी कहानी’ में लिखा …

Read More »

अज्ञेय की पहली जीवनी अंग्रेजी में लिखी जा रही है

कल एक कार्यक्रम में बोलते हुए अंग्रेजी के विद्वान् लेखक रामचंद्र गुहा ने यह बताया कि अज्ञेय की जीवनी लिखी जा रही है. प्रसिद्ध युवा पत्रकार अक्षय मुकुल हिंदी के विराट लेखक अज्ञेय की जीवनी अंग्रेजी में लिख रहे हैं. अक्षय ने ‘गीता प्रेस एंड मेकिंग ऑफ़ हिन्दू इण्डिया’ पुस्तक …

Read More »

क्या ‘रंगून’ कंगना की सबसे यादगार फिल्म होगी?

‘रंगून’ फिल्म या तो हंटरवाली नाडिया जैसे किरदार के कारण चर्चा में है या कंगना रानाउत के कारण. फिल्म के ट्रेलर, गानों से लेकर फिल्म को लेकर दिए गए अपने इंटरव्यू वगैरह में कंगना ने जिस तरह से बातें की हैं वह ‘रंगून’ को लेकर एक ख़ास तरह की दिलचस्पी …

Read More »

निर्मल वर्मा के शब्दों में देशप्रेम का मतलब

आजकल ‘देशप्रेम’ की चर्चा चरम पर जिसके बल हर तरह की हिंसा को जायज ठहराने की कोशिश की जाने लगी है. मुझे महान लेखक निर्मल वर्मा के निबंध की याद आई- मेरे लिए भारतीय होने का अर्थ. आजादी के पचास साल पूरे होने पर उन्होंने यह निबंध लिखा था. बीस …

Read More »

प्रियंका वाघेला की कुछ कविताएँ

मेरे जीमेल अकाउंट में अनजान पतों से आई रचनाओं में छत्तीसगढ़ की प्रियंका वाघेला की कविताओं पर नजर गई. प्रियंका वाघेला, चित्रकार व लेखिका हैं. ‘शैडो ऑफ़ थॉट्स’, ‘प्रिजनर्स ऑफ मून’ व ‘स्नेह संपदा’ इत्यादि फिल्मों के लिये पटकथा लिखी हैं। देश विदेश की विभिन्न कलादीर्घाओं में चित्रों का प्रदर्शन तथा कुछ …

Read More »

अखिलेश के उपन्यासों के केंद्र में बेदखल होता मनुष्य है

  कल मैंने एक आत्ममुग्ध लेखिका का यह वक्तव्य पढ़ा कि अखिलेश का उपन्यास ‘निर्वासन’ हिट नहीं हुआ. मुझे हैरानी हुई कि क्या साहित्यिक कृतियाँ, गंभीर साहित्यिक कृतियाँ हिट या फ्लॉप होती हैं? क्या साहित्यिक कृतियों का मूल्यांकन इस तरह से किया जाना चाहिए? यह गंभीर बात है कि किस …

Read More »

सर्वे में सामने आया सोशल मीडिया पर हिंदी अंग्रेजी से आगे

अभी स्टोरीनोमिक्स नामक एक कंसल्टेंसी फर्म का सर्वेक्षण सामने आया है जिसमें आंकड़ों के आधार पर यह बताया गया है कि इंटरनेट की बढती पहुँच और राष्ट्रवाद के उभार के कारण सोशल मीडिया पर हिंदी के उपयोगकर्ता बढे हैं, हिंदी की ख़बरें अधिक साझा होने लगी हैं. अगर यही ट्रेंड …

Read More »

उदय प्रकाश की कविता ‘एक भाषा हुआ करती है’

उदय प्रकाश हिंदी के कवि बताये गए सारे कवियों से अधिक क्रिएटिव और समकालीन हैं. उनकी कविताओं में अपनी आवाज सुनाई देती है. नई सदी में उन्होंने हिदी कविता को एक नया मुहावरा दिया है. मातृभाषा दिवस के दिन उदय प्रकाश की इस कविता से अच्छा क्या पढना होगा- मॉडरेटर …

Read More »

बज्जिका मेरा देस है हिंदी परदेस!

आज मातृभाषा दिवस है. समझ में नहीं आ रहा है कि किस भाषा को मातृभाषा कहूं- बज्जिका को, जिसमें आज भी मैं अपनी माँ से बात करता हूँ. नेपाली को, नेपाल के सीमावर्ती इलाके में रहने के कारण जो भाषा हम जैसों की जुबान परअपने आप चढ़ गई. भोजपुरी को, बचपन …

Read More »