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उनके दामन पर गुरुर के छींटे कभी नहीं पड़े:शांति हीरानन्द से यतीन्द्र मिश्र की बातचीत

आज मशहूर गायिका शांति हीरानंद का निधन हो गया। वह बेगम अख़्तर की शिष्या थीं और उन्होंने बेगम अख़्तर पर एक किताब भी लिखी थी। उनको याद करते हुए उनकी एक पुरानी बातचीत पढ़िए। बातचीत प्रसिद्ध कवि-लेखक यतींद्र मिश्र ने की है, जिन्होंने बेगम अख़्तर पर एक यादगार किताब संपादित …

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पुस्तकें भी लेखकों से लुका-छिपी का खेल खेलती हैं: अशोक वाजपेयी

अशोक वाजपेयी हिंदी के सबसे पढ़ाकू लेखक हैं। विश्व साहित्य का उनका संग्रह और ज्ञान अनुकरणीय है। इस उम्र में भी उनकी सक्रियता, उनका अध्ययन प्रेरक है। लॉकडाउन के दौर में जानकी पुल ने उनसे कुछ सवाल किए और उन्होंने जो जवाब दिए उसका पहला प्रभाव मेरे ऊपर यह पड़ा …

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‘वोल्गा से गंगा’ की सभ्यता यात्रा और दो कहानियाँ

आज महापंडित राहुल सांकृत्यायन की जयंती है। ‘वोल्गा से गंगा’ की दो कहानियों के माध्यम से एक लेख में श्रुति कुमुद ने उनके नवजागरण संबंधी विचारों को परखने की कोशिश की है।श्रुति कुमुद विश्वभारती शांतिनिकेतन में पढ़ाती हैं और विमर्श के मुद्दों को बहुत गम्भीरता से उठाती हैं। उनका एक …

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वाह उस्ताद : फनकार और सुनकार का साझा घराना

प्रवीण कुमार झा की किताब ‘वाह उस्ताद’ की समीक्षा लिखी है डॉक्टर असित कुमार गोस्वामी ने। देश विदेश में  अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके सितार वादक और साहित्य प्रेमी डॉ असित गोस्वामी वर्तमान में बीकानेर के राजकीय कन्या महाविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. यह किताब राजपाल एंड संज से …

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आश्चर्य का संगीत रचने वाला एक संगीतकार

आज प्रख्यात सितारवादक पंडित रविशंकर की सौवीं जयंती है। युवा कवि निर्वाण योगऋत ने उनकी संगीत यात्रा के कुछ महत्वपूर्ण पड़ावों की चर्चा इस लेख में की है- ================== महान सिने-मास्टर सत्यजित राय ने जब ‘पाथेर-पांचाली’ की कल्पना की थी-दृश्यों के रूप में तब कोई और भी था जिसने इस …

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अनघ शर्मा की कहानी ‘हिज्र के दोनों ओर खड़ा है एक पेड़ हरा’

युवा लेखक अनघ शर्मा किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनका कहानी संग्रह ‘धूप की मुँडेर’ राजकमल से प्रकाशित हुआ है और उसकी अच्छी चर्चा हुई है। यह उनकी नई कहानी है- ===== 1 जाने किन अनदेखे, अदृश्य बंजारों के रेवड़ धूल उड़ाते हुए उसके सामने से ऐसे गुज़रे कि …

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एडुवर्ड हेरेन्ट की की कविताएँ

एडुवर्ड हेरेन्ट की की कविताओं का अनुवाद किया है युवा कवयित्री अनामिका अनु ने– =====   आर्मेनिया   १. *** वाॅन गाॅ ने अपने कानों से मुक्ति पा ली क्योंकि उसे इसकी जरूरत नहीं थी वह असाधारण लोगों को पहले ही सुन चुका था   अल-मैरी वास्तव में इतना ज्यादा …

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काहे के भारत देश में आये कोरोनवा रे/ मार-मार के तोहके भगईहें पबलिकिया रे

आजकल कोरोना को लेकर गीत लिखे जा रहे हैं, दीये जलाए जा रहे हैं। युवा लेखक और इलाहाबाद में प्राध्यापक सुजीत कुमार सिंह ने अपने इस लेख में 1893 में लखनऊ के मुंशी नवल किशोर प्रेस से प्रकाशित ‘महारामायण को याद कर रहे हैं, जिसमें महिलाएँ गीत गा गाकर हैज़ा …

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रेणु के साहित्य से परिचित हुआ तो लगा खजाना मिल गया!

यह फणीश्वरनाथ रेणु की जन्मशताब्दी के साल की शुरुआत है। वरिष्ठ लेखक और रेणु की परम्परा के समर्थ हस्ताक्षर शिवमूर्ति जी का लेख पढ़िए रेणु की लेखन कला पर- मॉडरेटर ============= रेणु: संभवामि युगे युगे…             रेणु के साहित्य से परिचित हुआ तो लगा खजाना मिल गया। लिखने का कीड़ा …

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एक भू सुंघवा लेखक की यात्राएँ

राकेश तिवारी के यात्रा वृत्तांत ‘पहलू में आए ओर-छोर : दो देश चिली और टर्की’ पर प्रसिद्ध लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ की टिप्पणी। पुस्तक का प्रकाशन सार्थक, राजकमल ने किया है- ======== यात्रावृत्तातों की शैली में रोचक प्रयोग, मीठी व्यंजना, लोक भाषा के प्रयोग, पुरावेत्ता ( जिसे वे स्वयं भू सुंघवा कहते …

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