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ब्लू व्हेल’ गेम से भी ज़्यादा खतरनाक है ‘नकारात्मकता’ का खेल

संवेदनशील युवा लेखिका अंकिता जैन की यह बहसतलब टिप्पणी पढ़िए- मॉडरेटर ========================================== हम बढ़ती गर्मी, पिघलती बर्फ़ और बिगड़ते मानसून के ज़रिए प्रकृति का बदलता और क्रूर होता स्वभाव तो देख पा रहे हैं, पर क्या तकनीकि के दुरुपयोग से अपने बदलते और क्रूर होते मिज़ाज़ को समझ पा रहे …

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हे मल्लिके! तुमने मेरे भीतर की स्त्री के विभिन्न रंगो को और गहन कर दिया

अभी हाल में ही प्रकाशित उपन्यास ‘चिड़िया उड़’ की लेखिका पूनम दुबे के यात्रा संस्मरण हम लोग पढ़ते रहे हैं। आज उन्होंने वरिष्ठ लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ के चर्चित उपन्यास ‘मल्लिका’ पर लिखा है। आपके लिए- मॉडरेटर =============================== मनीषा कुलश्रेष्ठ जी की किताब मल्लिका पर लिखते हुए मुझे क्लॉड मोनेट की …

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प्रेम और कुमाऊँनी समाज के प्रेम का उपन्यास ‘कसप’

साहित्यिक कृतियों पर जब ऐसे लोग लिखते हैं जिनकी पृष्ठभूमि अलग होती है तो उस कृति की व्याप्ति का भी पता चलता है और बनी बनाई शब्दावली से अलग हटकर पढ़ने में ताज़गी का भी अहसास होता है। मनोहर श्याम जोशी के उपन्यास ‘कसप’ पर चन्द्रमौलि सिंह की इस टिप्पणी …

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रानी एही चौतरा पर

लेखक राकेश तिवारी का यात्रा वृत्तांत ‘पवन ऐसा डोले’ रश्मि प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। प्रस्तुत है उसी का एक अंश- मॉडरेटर रानी एही चौतरा पर ………………………….. अगले दिन सोन पार उतर कर अगोरी की ओर डोल गये। ऊँचे सिंहद्वार पर सिंहवाहिनी दुर्गा। भीतर, जहाँ-तहाँ बढ़ चले झाड़-गाछ-लतरें, ढही दीवारें, …

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सुजाता के उपन्यास के ‘एक बटा दो’ का अंश-इन जॉयफुल हॉप ऑफ रेजरेक्शन

युवा लेखिका सुजाता का उपन्यास  ‘एक बटा दो’ राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। स्त्री जीवन को लेकर लिखा गया यह उपन्यास अपने कथानक और भाषा दोनों में अलग है। इस अंश को पढ़िए और बताइएगा- मॉडरेटर =========================   इन जॉयफुल हॉप ऑफ रेजरेक्शन कभी जिस एकांत की ख़ूब कामना …

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जॉन नैश को श्रद्धांजलि स्वरूप विनय कुमार की कविता

जॉन नैश को कौन नहीं जानता। Game Theory के लिए अर्थशास्त्र के नोबल से सम्मानित नैश जीते जी ही किंवदंती बन गए थे। उनके जीवन पर बनी फ़िल्म Beautiful Mind एक ऑल टाइम क्लासिक मानी जाती है। फ़िल्म ने चार महत्त्वपूर्ण ऑस्कर अवार्ड जीते थे। जॉन नैश विस्फोटक प्रतिभा और …

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उपहार सिनेमा हॉल त्रासदी: न्याय की लड़ाई और ‘अग्निपरीक्षा’

आज दिल्ली के उपहार सिनेमा ट्रेजेडी के 22 साल हो जाएँगे। 13 जून 1997 को दर्शक मैटिनी शो में बॉर्डर फ़िल्म देख रहे थे कि सिनेमा हॉल में आग लग गई। निकास द्वार की कमी के कारण बाहर निकलते समय भगदड़ में 59 लोग मारे गए। मरने वालों में नीलम …

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‘क्या अब भी प्यार है मुझसे?’ का एक अंश

अंग्रेज़ी के लोकप्रिय लेखक रविंदर सिंह अपने हर उपन्यास में समाज की किसी समस्या को उठाते हैं और उसी के बीच उनकी प्रेम कहानी चलती है। उनके उपन्यास ‘will you still love me?’ में सड़क दुर्घटना को विषय बनाया गया है ताकि युवाओं में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर जागरूकता पैदा …

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राष्ट्रवाद के भारी बारिश की उम्मीद है

आज यह व्यंग्य पढ़िए। लिखा है सेंट स्टीफेंस कॉलेज में इतिहास के विद्यार्थी उन्नयन चंद्र ने- मॉडरेटर ============================================== भारत की लगभग 44 फ़ीसदी आबादी जल संकट से जूझ रही है. गर्मी में चापाकल सूख रहे है. टुल्लू पम्प में पानी ऐसे आ रहा है जैसे मोपेड एवरेस्ट पर चढ़ रहा हो. महाराष्ट्र …

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क्या मार्क्सवाद ने सचमुच हिंदी साहित्य का भारी नुक़सान कर दिया?

हिंदी पत्रकारिता में दक्षिणपंथ की सबसे बौद्धिक आवाज़ों में एक अनंत विजय की किताब ‘मार्क्सवाद का अर्धसत्य’ ऐसे दौर में प्रकाशित हुई है जब 2019 के लोकसभा चुनावों में वामपंथी दलों की बहुत बुरी हार हुई है, वामपंथ के दो सबसे पुराने गढ़ केरल और पश्चिम बंगाल लगभग ढह चुके …

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