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उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ हमारे संगीत की रूह और आत्मा में बसे हुए हैं

कल उस्ताद बिस्मिल्ला खान की जयंती थी. उस्ताद बिस्मिल्ला खान दशकों तक शहनाई के पर्याय की तरह रहे. उनके ऊपर बहुत अच्छी किताब यतीन्द्र मिश्र ने लिखी है ‘सुर की बारादरी’. आज खान साहब पर यतीन्द्र मिश्र की लिखी यह छोटी सी सारगर्भित टिप्पणी- मॉडरेटर ——————————————— भारतीय शास्त्रीय संगीत में उस्ताद …

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तुम्हारी देह जिस आत्मा का घर थी उसे विदा कर दिया है

केदारनाथ सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए यह लेख अंजलि देशपांडे ने लिखा है. अंजलि जी ने हाल में ही जगरनॉट ऐप पर एक जबरदस्त सामाजिक थ्रिलर ‘एक सपने की कीमत’ लिखा है. इससे पहले राजकमल प्रकाशन से इनका उपन्यास ‘महाभियोग’ प्रकाशित है- मॉडरेटर ====================== “जो कवि कविता के साथ इतना …

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अपने लिए खुद का एक कमरा चाहती है स्त्री

 वरिष्ठ लेखिका विजय शर्मा की पुस्तक ‘विश्व सिनेमा में स्त्री’ के लोकार्पण समारोह की रपट- मॉडरेटर =================================================== लौह नगरी जमशेदपुर में 25 फरवरी की वासंती सुबह होटल मिष्टी इन के भव्य सभागार में साहित्य, कला और सिनेमा प्रेमियों ने फिल्म पर समीक्षात्मक लेखन के क्षेत्र में एक विशिष्ट अध्याय जुड़ते हुए देखा। मौका …

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किसान आंदोलनों के पीछे षड़यंत्र नहीं किसानों के दर्द को समझिये!

देश में किसानों के संघर्ष बढ़ रहे हैं. हम उसको समझने के स्थान पर या तो उनके मध्यवर्गीय समाधान सुझा रहे हैं या उसके पीछे किसी बड़े राजनीतिक षड़यंत्र को देख रहे हैं. कुमारी रोहिणी का यह लेख ऐसे ही कुछ सवालों को समझने की एक कोशिश की तरह है- …

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बेगानों को अपना बनाने वाली किताब ‘न बैरी न कोई बेगाना’

‘न बैरी न कोई बेगाना’– 390 पेज की यह किताब आत्मकथा है जासूसी उपन्यास धारा के सबसे प्रसिद्ध समकालीन लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा का नाम है. इसको पढ़ते हुए दुनिया के महानतम नहीं तो महान लेखकों में एक गैब्रिएल गार्सिया मार्केज की यह बात याद आती रही- जिन्दगी …

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पागल बनाने वाला उपन्यास है ‘पागलखाना’

  राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास ‘पागलखाना’ पर यशवंत कोठारी की टिप्पणी- मॉडरेटर ================================================================= राजकमल प्रकाशन ने ज्ञान चतुर्वेदी का पागलखाना छापा है। 271  पन्नों का  उपन्यास ऑनलाइन 595  रूपये (536+30+29)का पड़ा।  14 दिनों में डिलीवरी मिली। कवर पर  शेर और उसकी परछाई देख कर  ही डर …

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युवा शायर विजय शर्मा की कहानी ‘लिविंग थिंग’

आज पेश है युवा शायर विजय शर्मा की कहानी लिविंग थिंग – त्रिपुरारि ==================================================== छुट्टियों वाले दिन नींद अक्सर जल्द खुल जाया करती है..यदि छुट्टी सोमवार की हो, तो शायद और भी जल्द.. सुबह के नौ बज चुके थे और अयान अबतक अपनी बिस्तर में क़ैद था.. हालाँकि पिछले दो …

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उर्दू का मैं पहला शायर हूँ जिसकी किताब के अपनी ही जिंदगी में इतने एडिशन छपे:साहिर

आज साहिर लुधियानवी का जन्मदिन है. उनका नाम याद आते ही मोहब्बत और मोहब्बत के अफ़साने याद आने लगते हैं. लेकिन उनसे उनके कई समकालीन बेहद जलते भी थे. तरक्कीपसंद लेखक हंसराज रहबर ने अपनी आत्मकथा ‘मेरे सात जनम’ में साहिर की खूब खबर ली है. तारीफ कर कर के …

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आदम हुआ न आदम, हव्वा हुई न हव्वा — बाबुषा की कविताएँ

तुमने खेल-खेल में मेरा बनाया बालू का घर तोड़ दिया था, तुम इस बार फिर से बनाओ, मैं इस बार नहीं तोड़ूँगी। ग़लती थी मेरी, मैंने तोड़े थे। मैं तुम बनती जा रही थी। तुम धूप ही रहो, मैं छाँव ही रहूँ। तुम कठोर ही रहो, मैं कोमल ही रहूँ। …

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ऑनलाइन समाचार की दुनिया में नयापन क्यों नहीं है?

ऑनलाइन समाचारों की दुनिया पर ‘हिंदी में समाचार’ जैसी शोधपरक पुस्तक के लेखक अरविन्द दास का लेख- मॉडरेटर =============== श्रीदेवी की दुखद मौत बॉलीवुड और उनके फैन्स के लिए सदमे से कम नहीं था. उनकी मौत होटल के बाथटब में दुर्घटनावश डूबने के कारण हुई, लेकिन टेलीविजन न्यूज चैनल ने …

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