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धर्म विरुद्ध आचरण पर किताब बांटने की सजा

चंडीगढ़ में एक खबर की तरफ ध्यान गया. खबर मोगा जिले के बहोना गाँव की थी. वहां के सरपंच को सिख संगत की तरफ से तनखैया यानी धर्म विरुद्ध आचरण का दोषी ठहराया गया. कारण था कि उसने अपनी दाढ़ी डी सी के ऑफिस में जाकर कटवा ली थी. क्योंकि …

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गाँधी जी ने जातिवाद का अंत करने के लिए कुछ भी नहीं किया?

गाँधी जी को चतुरत बनिया कहे जाने के बाद से बहस चल पड़ी है. अनुवादक-लेखक मनोहर नोतानी ने अपनी इस टिप्पणी ने एक सवाल तो अच्छा उठाया है कि गांधी जी जाति व्यवस्था की चूलें नहीं हिला पाए- मॉडरेटर =============================================== गांधी बनिये तो थे ही – आधिकारिक रूप से वे …

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हमारे दिनों का अनुसंधान है इरा टाक की ‘रात पहेली’

बीते विश्व पुस्तक मेले में इरा टाक का कहानी संग्रह आया था ‘रात पहेली‘, संग्रह की कहानियों पर बहुत विस्तृत लेख लिखा है लेखक-पत्रकार प्रकाश के रे ने- मॉडरेटर ======================= प्रेम, प्रेम संबंध और स्त्री-पुरुष के समीकरणों को टटोलना साहित्य का आदिम स्वभाव है. नवोदित रचनाकार भी इस प्रभाव से …

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शहरयार कलाम ऐसे पढ़ते जैसे कोई धीमी गति का समाचार पढता हो

आज उर्दू के प्रख्यात शायर शहरयार साहब की जन्मतिथि है. जनाब रवि कुमार का संस्मरणात्मक लेख उनकी शख्सियत और शायरी पर पेश है- मॉडरेटर ===================  [ उर्दू के प्रसिद्ध शायर प्रो॰ अख़लाक मोहम्मद खाँ ‘शहरयार’ के जन्म दिन पर विशेष संस्मरण ] बात शायद अप्रैल 1982 की है,  हिन्दी फिल्म …

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अरुंधति रॉय के नए उपन्यास में सब कुछ है और कुछ भी नहीं

  अरुंधति रॉय के बहुचर्चित उपन्यास ‘द मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ पर यशवंत कोठारी की टिप्पणी- मॉडरेटर ======================================================= अरुंधती रॉय  का दूसरा उपन्यास –मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैप्पीनेस(चरम प्रसन्नता का मंत्रालय ) आया है. इस से पहले वह ‘मामूली चीजों का देवता’ लिख कर बुकर पुरस्कार जीत चुकी हैं- गॉड ऑफ़ …

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भारतीय उप-महाद्वीप की भाषाओं की चैपियंस ट्रॉफी

चैम्पियंस ट्रॉफी जो भी जीते इतना तय है कि अंग्रेजियत हारेगी. इंग्लैण्ड तो पाकिस्तान से पहले ही हार चुकी है. यह पहली बार है जब आईसीसी के किसी टूर्नामेंट में तीन ऐसे देश सेमी फाइनल में पहुंचे हैं जिनका डीएनए एक रहा है. जिसे मजाक में वीरेंदर सहवाग ने दादा, …

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जयंती रंगनाथन और ‘बॉम्बे मेरी जान’

वरिष्ठ पत्रकार जयंती रंगनाथन की किताब आई है ‘बॉम्बे मेरी जान’. इस किताब पर कादम्बिनी पत्रिका के पत्रकार अरुण कुमार जेमिनी की यह टिप्पणी- मॉडरेटर ===================== मैं लगभग छह साल पहले इनसे पहली बार मिलाथा। वह भी तब जब इन्होंने ‘हिंदुस्तान’ ज्वाइन किया। कह नहीं सकता कि अगर ये ‘हिंदुस्तान’ …

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शिक्षारूपी शकुंतला अभी अधूरी पड़ी हुई है

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी बहुत अच्छे वक्ता थे. उनके एक भाषण का अंश किसी ने भेजा है. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ========================================================= आपका ध्यान कालिदास के शकुंतला नाटक की ओर ले जाना चाहता हूँ। दुष्यंत अच्छा प्रेमी था यह तो आप जानते ही हैं, गलती हो गई थी, उससे अंगूठी …

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जमशेदपुर में ‘सृजन संवाद’ में विकास कुमार झा के उपन्यास पर चर्चा

   गत रविवार जमशेदपुर में विकास कुमार झा के उपन्यास पर चर्चा हुई. उसी की रपट भेजी है विजय शर्मा ने- आज जैसी जीवन्त, सार्थक अनौपचारिक साहित्यिक गोष्ठी शायद ही पहले कभी हुई हो। ‘सृजन संवाद’ में सबसे पहले तो डॉ. भास्कर राव ने अपनी बदरीनाथ-केदारनाथ की यात्रा के संस्मरण …

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मृत्यु-गंध में लिपटी स्वदेश दीपक की ‘बगूगोशे’ की ख़ूशबू

जगरनॉट बुक्स से स्वदेश दीपक की आखिरी कहानियों का संग्रह प्रकाशित हुआ है- बगूगोशे. इस संग्रह पर युवा लेखक-पत्रकार अरविन्द दास की लिखत पढ़िए. कितनी आत्मीयता से लिखा है- मॉडरेटर ======================================= मृत्यु-गंध कैसी होती है/ वह एक ऐसी खुशबू है/ जो लंबे बालों वाली/ एक औरत के ताजा धुले बालों …

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