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कुँवर नारायण और उनकी किताब ‘लेखक का सिनेमा’

80-90 के दशक में कुंवर नारायण विश्व सिनेमा पर दिनमान, सारिका और बाद में नवभारत टाइम्स में लिखा करते थे. अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में दिखाई गई फिल्मों पर. उन्होंने उस गूगलविहीन दौर में एक पीढ़ी को विश्व सिनेमा से परिचित करवाया. हाल में ही राजकमल प्रकाशन से उनकी किताब आई …

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कृष्ण का जीवन उत्सव का संदेश बन गया!

आज जन्माष्टमी भी है. युवा लेखक विमलेन्दु का एक अवश्य पठनीय टाइप लेख इस मौके पर पढ़िए- मॉडरेटर ================================================= ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास  न होने के बाद भी कृष्ण मेरे प्रिय पात्र रहे हैं. कई बार जब किसी प्रश्न का जवाब ढूढ़ना मेरी सामर्थ्य के बाहर हो जाता है …

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अमृत रंजन का लेख ‘अंत जिज्ञासा है’

स्कूली लेखक अमृत रंजन जैसे जैसे बड़ा होता जा रहा है उसके लेखन-सोच का दायरा बड़ा होता जा रहा है. उसके लेखन में गहरी दार्शनिकता आ गई है. सबसे बड़ी बात यह है कि हिन्दुस्तान से आयरलैंड जा चुका है लेकिन हिंदी में लिखना नहीं छूटा है. इस बार पढ़ते …

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स्मिता सिन्हा की आठ नई कविताएँ

स्मिता सिन्हा की कविताएँ प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में छपती रहती हैं, सराही जाती हैं. उनका एक अपना समकालीन तेवर है, संवेदना और भाषा है. प्रस्तुत है कुछ नई कविताएँ- मॉडरेटर ============================ (1) मैंने देखे हैं उदासी से होने वाले बड़े बड़े खतरे इसीलिए डरती हूँ उदास होने से डरती हूँ …

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तन्हाई का अंधा शिगाफ़ : भाग-10 अंतिम

आप पढ़ रहे हैं तन्हाई का अंधा शिगाफ़। मीना कुमारी की ज़िंदगी, काम और हादसात से जुड़ी बातें, जिसे लिख रही हैं विपिन चौधरी। आज पेश है दसवाँ यानी अंतिम भाग – त्रिपुरारि ======================================================== अफवाहें देती रही ज़ख्मों पर हवा कहाँ जाता है शोहरत की कीमत जरूर  चुकानी पड़ती है. …

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तन्हाई का अंधा शिगाफ़ : भाग-9

आप पढ़ रहे हैं तन्हाई का अंधा शिगाफ़। मीना कुमारी की ज़िंदगी, काम और हादसात से जुड़ी बातें, जिसे लिख रही हैं विपिन चौधरी। आज पेश है नौवाँ भाग – त्रिपुरारि ======================================================== गहरी खाई थी अभिनेत्री मीना कुमारी और स्त्री मीना कुमारी के  बीच अभिनेत्री मीना कुमारी और स्त्री मीना …

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तन्हाई का अंधा शिगाफ़ : भाग-8

आप पढ़ रहे हैं तन्हाई का अंधा शिगाफ़। मीना कुमारी की ज़िंदगी, काम और हादसात से जुड़ी बातें, जिसे लिख रही हैं विपिन चौधरी। आज पेश है आठवाँ भाग – त्रिपुरारि ======================================================== पिंजरे बदलते रहे, मैना वही रही बचपन में मीना कुमारी अपने पिता के साथ दादर में रहती थी …

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राजेश प्रधान की दो नई कविताएँ

बोस्टन प्रवासी राजेश प्रधान पेशे से वास्तुकार हैं, राजनीतिशास्त्री हैं. हिंदी में कविताएँ लिखते हैं. उनकी कविताओं में सतह के नीचे की दार्शनिकता, विचार, गहन चिंतन है जो उनकी कविताओं को एक अलग ही स्वर देता है. उनकी दो अलग मिजाज की कविताएँ आज पढ़िए- मॉडरेटर ======================= 1 सृष्टि और …

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तन्हाई का अंधा शिगाफ़ : भाग-7

आप पढ़ रहे हैं तन्हाई का अंधा शिगाफ़। मीना कुमारी की ज़िंदगी, काम और हादसात से जुड़ी बातें, जिसे लिख रही हैं विपिन चौधरी। आज पेश है सातवाँ भाग – त्रिपुरारि ======================================================== बच्चों की आपा– मीना कुमारी मीना कुमारी को बच्चों से बहुत प्रेम था, फिल्मों में वह ममतामयी माँ …

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तन्हाई का अंधा शिगाफ़ : भाग-6

आप पढ़ रहे हैं तन्हाई का अंधा शिगाफ़। मीना कुमारी की ज़िंदगी, काम और हादसात से जुड़ी बातें, जिसे लिख रही हैं विपिन चौधरी। आज पेश है छठा भाग – त्रिपुरारि ======================================================== कद्दावर नायक, जो मीना कुमारी के कद से ऊपर नहीं उठ सके पिता और पति के बीच  अपने …

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