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फिल्म समीक्षा

फिल्म में लड़ाई पद्मावती के लिए नहीं बल्कि पद्मावती से है

इसमें कोई शक नहीं कि हाल के दिनों में सबसे अधिक व्याख्या-कुव्याख्या संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ को लेकर हुई. बहरहाल, यह एक व्यावसायिक सिनेमा ही है और मनोरंजक भी है. इस फिल्म पर जेएनयू में कोरियन भाषा की शोधार्थी कुमारी रोहिणी की समीक्षा- मॉडरेटर ============================= बात तो सच …

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मैं कर सकती है- यह फिल्म हमसे यही कहती है !

‘तुम्हारी सुलू’ फिल्म की यह समीक्षा युवा कवयित्री, फिल्मकार प्रियंका वाघेला ने लिखी है. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ====================================================== “तुम्हारी सुलु” एक एसी स्त्री की कहानी कहती है -जो शिक्षा के क्षेत्र में सफल नहीं है व अपने पिता और बहनों के द्वारा इस बात को लेकर लगभग अपमानित की …

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कई जोड़ी आँखों के सपने और एक ‘सीक्रेट सुपरस्टार’

‘सीक्रेट सुपरस्टार’ फिल्म पर कवयित्री स्मिता सिन्हा की एक अच्छी टिप्पणी- मॉडरेटर ======================================== ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ कहानी है सपनों के बनने की । एक ऐसा साझा सपना , जिसे एक साथ एक ही वक़्त में कई जोड़ी आंखें देखती हैं । यह कहानी है एक बेख़ौफ़ ज़िद की । एक ज़िद …

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‘न्यूटन’ फिल्म नही एक पूरी की पूरी विचार प्रक्रिया है

‘न्यूटन’ फिल्म जब से आई है लगातार चर्चा में बनी हुई है. आज युवा लेखक नवल किशोर व्यास का लेख पढ़िए- मॉडरेटर ============= अमित मसूरकर की फिल्म न्यूटन का विचार अदभुत और पावन है। यह लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव कहे जाने वाले चुनाव और देश के दूरदराज, मुख्य धारा …

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आर्मेनियाई फिल्म ‘वोदका लेमन’ पर श्री का लेख

2003 की आर्मेनियाई फिल्म ‘वोडका लेमन’ पर श्री(पूनम अरोड़ा) का यह लेख उनकी कविताओं की तरह ही बेहद सघन है. पढियेगा- मॉडरेटर ====== जहाँ जीवन और उसके विकल्प उदास चेहरों की परिणीति में किसी उल्लास की कामना करते मिलते हैं. जहाँ यह चाहा जाता है कि गरीबी में किसी एक, …

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काश बुरके के भीतर लिपस्टिक की बजाय सपना पलता!

फिल्म लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ पर एक अच्छी टिप्पणी युवा लेखिका निवेदिता सिंह की- मौडरेटर ============================================= लिपस्टिक अंडर माए बुरखा फ़िल्म तब से चर्चा में है जबसे से इसका निर्माण शुरू हुआ है पर फ़िल्म ज्यादा चर्चित तब हुई जब रिलीज से पहले फ़िल्म सेंसर बोर्ड में अटक गई। अटकना …

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जापानी फिल्म ‘इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस’ पर श्री का लेख

मुक्त जुनून कामनाओं के सब द्वार खोलता है या कि शांत और अबोधगम्य आकाश के खालीपन में खुद को रिक्त कर देता है? – इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस नागिसा ओसीमा के निर्देशन में बनी 1976 में प्रदर्शित हुई एक विवादास्पद जापानी फिल्म …

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दक्षिण कोरियन फिल्म ‘द बो’ और श्री का लेख

श्री(पूनम अरोड़ा) दक्षिण कोरियाई फिल्म निर्देशक किम की डुक की फिल्मों पर पहले भी लिख चुकी हैं. इस बार उनका यह लेख the bow पर है- मॉडरेटर ==================== मुक्त होने और मुक्त करने का सम्मोहन है हथेली पर पिघले मोम की तरह ! अमूर्त सत्य को मूर्त सम्मोहन में बदल …

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हिंदी मीडियम टाईप होना कब तक हीन भावना का कारण बना रहेगा?

‘हिंदी मीडियम’ फिल्म जब से आई है तब से देख रहा हूँ कि सभी इसके ऊपर लिख रहे हैं. यह एक ऐसी फिल्म साबित हुई है जिसने लाखों लोगों के दिल की बात जैसे कह दी है. आज बिपिन कुमार पाण्डेय का विस्तृत लेख- मॉडरेटर ==================================================== एक हमारे मित्र हैं, …

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अंग्रेजी एक क्लास है जबकि हिंदी मीडियम

‘हिंदी मीडियम’ फिल्म की ख़ूब तारीफ हो रही है. अपने सब्जेक्ट और अभिनय दोनों ही कारण से. इस फिल्म पर एक विस्तृत लेख निवेदिता सिंह ने लिखा है- मॉडरेटर ========================= “इस देश में अंग्रेजी ज़बान नहीं है, क्लास है” शुक्रवार को रिलीज हुई हिंदी फिल्म “हिंदी मीडियम”का एक डॉयलाग भर …

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