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फिल्म समीक्षा

हर लिहाज़ से एक सराहनीय फिल्म है ‘पीहू’

फिल्म ‘पीहू’ की समीक्षा सैयद एस. तौहीद द्वारा लिखी हुई- मॉडरेटर ===================================== कल्पना कीजिए एक ऐसी कहानी जिसमें अकेली मासूम घर में अकेली रह जाए। बच्ची खुद ही खाना बनाए और फिर गैस को जलता हुआ छोड़ दे। खुद को फ्रिज में बंद कर ले। ऐसे कई हैरत से भरे …

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पिता व पुत्री के सुंदर रिश्ते पर आधारित ‘The Frozen Rose’

ईरानी शार्ट फिल्म ‘फ्रोज़ेन रोज’ पर सैयद एस. तौहीद की टिप्पणी- मॉडरेटर ============================================ इंसान दुनिया में जिस किसी को मोहब्बत में जान से ज्यादा अजीज बना लेता है परवरदिगार उसे उस जैसा बना दिया करता है. खुदा की दूसरी दुनिया के बाशिंदों को इंतज़ार करने वाली रूहें कहना चाहिए. इंसान …

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बड़े जहाज का दिशाहीन सफ़र ‘ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तान’

‘ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तान’ की यह समीक्षा लिखी है सैयद एस. तौहीद ने- मॉडरेटर ============================================== साल की बहुप्रतीक्षित ‘ठग्स ऑफ़ हिंदोस्तान’ रिलीज़ हो चुकी है। दिवाली का मौका और आमिर खान के होने का इस फिल्म को पूरा फायदा मिला है। फिल्म ने पहले ही दिन धमाकेदार कमाई कर  52.25 करोड़ …

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भिंचे जबड़ों को खुलकर हँसने देने का मौका देने वाली फिल्म

सिनेमा पर मुझे अक्सर ऐसे लोगों का लिखा पसंद आता है जो उस विषय के पेशेवर लेखक नहीं होते हैं. फिल्म ‘बधाई’ हो’ पर यह टिप्पणी डॉ. आशा शर्मा ने लिखी है. दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में पढ़ाती हैं, रंगमंच की विशेषज्ञ हैं और एक पठनीय टिप्पणी उन्होंने इस …

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गांधी के वैष्णव को यहाँ से समझिए

जाने–माने पत्रकार और लेखक मयंक छाया शिकागो में रहते हैं और मूलतः अंग्रेजी में लिखते हैं। दलाई लामा की आधिकारिक जीवनी उन्होंने ही लिखी है जिसका तर्जुमा चौबीस भाषाओं में हो चुका है.  उन्होंने 2015 में गान्धीज सौंग नामक फिल्म बनाई, जो हिंसा के दौर में गांधी के विचारों की प्रासंगिकता को दर्शाती …

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आलिया भट्ट के अभिनय का नया मुकाम है ‘राज़ी’

जब से ‘राज़ी’ फिल्म आई है इसकी चर्चा थम नहीं रही है. मेघना गुलजार की इस फिल्म को आलिया भट्ट के लिए भी याद किया जायेगा. इसी फिल्म पर निवेदिता सिंह का लेख- मॉडरेटर ==================================== हाल के वर्षों में जिस अभिनेत्री ने अपने अभिनय के दम पर सबसे ज़्यादा ध्यान …

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अकेलेपन और एकांत में अंतर होता है

‘अक्टूबर’ फिल्म पर एक छोटी सी टिप्पणी सुश्री विमलेश शर्मा की- मॉडरेटर ============================================ धुँध से उठती एक महीन धुन,शाख़ पर खिलता फूल , टूट कर बिखरता चाँद हो या फिर पत्तों की सरसराहट ; दरअसल भाषायी संस्कारों में ये सभी प्रकृति की अद्भुत लीला के प्रतीक भर हैं। इस लीला …

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चार्ली चैपलिन की जयंती पर विशेष

आज चार्ली चैपलिन की जयंती है. ऐसे में उनकी फिल्म ‘द किड’ को याद किया है युवा फिल्म अध्येता सैयद एस. तौहीद ने. आजकल बच्चों को लेकर जिस तरह हमारे समाज की संवेदना छीजती जा रही है वैसे में इस फिल्म को याद करना प्रासंगिक भी है- मॉडरेटर ================= चार्ली …

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सुरेन्द्र नाथ उर्फ़ ‘बॉम्बे सहगल’ के बारे में आप कितना जानते हैं?

गुजरे जमाने के स्टार सुरेन्द्रनाथ उर्फ़ बॉम्बे सहगल को याद करते हुए एक अच्छा लेख सैयद एस. तौहीद का- मॉडरेटर ============================================================= किसी ने नहीं सोचा होगा कि वकालत की डिग्री रखने वाले सुरेंद्रनाथ उर्फ सुरेंद्र हिंदी सिनेमा के बड़े स्टार बनेंगे। लेकिन ऊपर वाला उनमें एक अलग मिजाज देख रहा …

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‘हिचकी’ फिल्म पर पूनम अरोड़ा की टिप्पणी

‘हिचकी’ फिल्म पर यह लेख लेखिका पूनम अरोड़ा(श्री) ने लिखा है.  अच्छा लगा तो साझा कर रहा हूँ- मॉडरेटर ================================================================= नैना माथुर को टुरेट सिंड्रोम है जिसे साधारण भाषा में समझा जाए तो ‘बार-बार हिचकी आना, चेहरे के हाव-भाव अलग दिखना, गले से कुछ आवाज़े आना और आँखों का झपकना …

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