Home / फिल्म समीक्षा (page 3)

फिल्म समीक्षा

मनमोहन देसाई और उनका सिनेमा

मार्च महीने की पहली तारीख़ को मनमोहन देसाई का निधन हुआ था. आज महीने की आखिरी तारीख़ पर सैय्यद एस. तौहीद का यह लेख उनकी फिल्मों के कुछ सूत्रों की अच्छी व्याख्या करता है लेकिन सम्पूर्णता में नहीं. एक बार कमलेश्वर ने अपने एक इंटरव्यू में यह कहा था कि मनमोहन …

Read More »

  ‘हिचकी’ : शिक्षा व्यवस्था की बेहतरीन पड़ताल

‘हिचकी’ फिल्म की एक अच्छी समीक्षा लिखी है दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरु कॉलेज में प्राध्यापक और लेखक मनोज मल्हार ने- मॉडरेटर       ‘हिचकी’  ब्रैड कोहेन की पुस्तक ‘फ्रंट ऑफ़ द क्लास : हाउ टूरेट मेड मी द टीचर आई नेवर हैड’ पर आधारित और सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा द्वारा निर्देशित …

Read More »

फिल्मों के अंतरिक्ष से एक चकित करने वाला धूमकेतु है ‘ब्लैक पैंथर’

लेखक लेखिकाओं की पूरी नई पीढी हमारे बीच आ चुकी है. अब यह फिल्म समीक्षा ही देखिये. अमेरिकन सुपर हीरो फिल्म की यह बारीक समीक्षा लिखी है कनुप्रिया कुलश्रेष्ठ ने. पढ़िए और नई पीढ़ी का स्वागत कीजिये- मॉडरेटर =============================================================== मैं फ़िल्में बहुत देखती हूँ, मगर फिल्म – रिव्यू!! मेरे बस …

Read More »

फिल्म में लड़ाई पद्मावती के लिए नहीं बल्कि पद्मावती से है

इसमें कोई शक नहीं कि हाल के दिनों में सबसे अधिक व्याख्या-कुव्याख्या संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ को लेकर हुई. बहरहाल, यह एक व्यावसायिक सिनेमा ही है और मनोरंजक भी है. इस फिल्म पर जेएनयू में कोरियन भाषा की शोधार्थी कुमारी रोहिणी की समीक्षा- मॉडरेटर ============================= बात तो सच …

Read More »

मैं कर सकती है- यह फिल्म हमसे यही कहती है !

‘तुम्हारी सुलू’ फिल्म की यह समीक्षा युवा कवयित्री, फिल्मकार प्रियंका वाघेला ने लिखी है. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ====================================================== “तुम्हारी सुलु” एक एसी स्त्री की कहानी कहती है -जो शिक्षा के क्षेत्र में सफल नहीं है व अपने पिता और बहनों के द्वारा इस बात को लेकर लगभग अपमानित की …

Read More »

कई जोड़ी आँखों के सपने और एक ‘सीक्रेट सुपरस्टार’

‘सीक्रेट सुपरस्टार’ फिल्म पर कवयित्री स्मिता सिन्हा की एक अच्छी टिप्पणी- मॉडरेटर ======================================== ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ कहानी है सपनों के बनने की । एक ऐसा साझा सपना , जिसे एक साथ एक ही वक़्त में कई जोड़ी आंखें देखती हैं । यह कहानी है एक बेख़ौफ़ ज़िद की । एक ज़िद …

Read More »

‘न्यूटन’ फिल्म नही एक पूरी की पूरी विचार प्रक्रिया है

‘न्यूटन’ फिल्म जब से आई है लगातार चर्चा में बनी हुई है. आज युवा लेखक नवल किशोर व्यास का लेख पढ़िए- मॉडरेटर ============= अमित मसूरकर की फिल्म न्यूटन का विचार अदभुत और पावन है। यह लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव कहे जाने वाले चुनाव और देश के दूरदराज, मुख्य धारा …

Read More »

आर्मेनियाई फिल्म ‘वोदका लेमन’ पर श्री का लेख

2003 की आर्मेनियाई फिल्म ‘वोडका लेमन’ पर श्री(पूनम अरोड़ा) का यह लेख उनकी कविताओं की तरह ही बेहद सघन है. पढियेगा- मॉडरेटर ====== जहाँ जीवन और उसके विकल्प उदास चेहरों की परिणीति में किसी उल्लास की कामना करते मिलते हैं. जहाँ यह चाहा जाता है कि गरीबी में किसी एक, …

Read More »

काश बुरके के भीतर लिपस्टिक की बजाय सपना पलता!

फिल्म लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ पर एक अच्छी टिप्पणी युवा लेखिका निवेदिता सिंह की- मौडरेटर ============================================= लिपस्टिक अंडर माए बुरखा फ़िल्म तब से चर्चा में है जबसे से इसका निर्माण शुरू हुआ है पर फ़िल्म ज्यादा चर्चित तब हुई जब रिलीज से पहले फ़िल्म सेंसर बोर्ड में अटक गई। अटकना …

Read More »

जापानी फिल्म ‘इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस’ पर श्री का लेख

मुक्त जुनून कामनाओं के सब द्वार खोलता है या कि शांत और अबोधगम्य आकाश के खालीपन में खुद को रिक्त कर देता है? – इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस नागिसा ओसीमा के निर्देशन में बनी 1976 में प्रदर्शित हुई एक विवादास्पद जापानी फिल्म …

Read More »