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फिल्म समीक्षा

नवरात्र, बांगला संस्कृति और ‘अंधी छलांग’

नवरात्र के दौरान बांगला समाज के जीवन, उनकी संस्कृति और एक स्त्री के निजी जीवन की त्रासदी को लेकर बांगला भाषा की नई दौर की चर्चित लेखिका मंदाक्रान्ता सेन का उपन्यास है ‘अंधी छलांग’. आज महानवमी है. आज इस उपन्यास पर लिखा यह लेख. लिखा है हिंदी लेखिका शर्मिला बोहरा …

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क्या 2 अक्टूबर 1869 महात्मा गाँधी की सही जन्मतिथि नहीं है?

लोग भी किन किन बातों पर कितना शोध करते हैं. एक सदानंद पॉल जी हैं. पढ़िए इन्होने क्या शोध किया है? हाँ, लेख के बाद उनका परिचय भी धैर्यपूर्वक पढियेगा- मॉडरेटर  ======================================== आज से 10 साल पहले मैंने स्व0 देवकीनन्दन सिंह की पुस्तक ‘ज्योतिष- रत्नाकर‘ (पृष्ठ संख्या- 979 से 985 …

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पति, पत्नी और वो का मुकदमा और ‘रुस्तम’

नानावती के प्रसिद्ध मुकदमे को लेकर फिल्म आई है ‘रुस्तम’. पति, पत्नी और वो की इस कहानी को देखने का नजरिया भी समय के साथ बदलता जा रहा है और इसकी व्याख्या भी. ‘रुस्तम’ की एक आलोचनात्मक समीक्षा लेखिका दिव्या विजय ने लिखी है- मॉडरेटर. ============================================ सीपिया शेड की यह …

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‘धनक’ में जीवन का इन्द्रधनुष है

‘उड़ता पंजाब’ के हल्ले में नागेश कुकनूर की फिल्म ‘धनक’ की चर्चा ही नहीं हुई. आज लेखक रवि बुले की समीक्षा पढ़ते हैं फिल्म ‘धनक’ पर- मॉडरेटर  ============================= —-हैदराबाद ब्लूज (१९९८), इकबाल (२००५) और डोर (२००६) जैसी फिल्में बनाने वाले नागेश कुकुनूर एक बार फिर रंगत में हैं। धनक का …

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उड़ते-उड़ते इस फिल्म की जान भी उड़ गयी

‘उड़ता पंजाब’ फिल्म को लेकर लोगों ने ऐसे लिखा जैसे सोशल एक्टिविज्म कर रहे हों. फिल्म का ठीक से विश्लेषण बहुत कम लोगों ने किया. युवा लेखिका अणुशक्ति सिंह ने एक बहुत चुटीली समीक्षा लिखी है इस फिल्म की. पढ़िए- मॉडरेटर  =================== पाकिस्तान से गोले उड़े कि हिंदुस्तान मे गर्द …

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एक अनुवाद पुस्तक जो अनुवाद के मानक की तरह है!

 क्या सच में हिंदी की दुनिया बदल गयी है, बदल रही है. एक जमाने में अच्छी किताबों की चर्चा हुआ करती थी, आज उनको नजरअंदाज कर दिया जाता है. ऐसा ही एक अनुवाद जाने माने आलोचक, अनुवादक मदन सोनी द्वारा किया हुआ आया है- खाली नाम गुलाब का. अम्बर्तो इको …

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एक अनजानी दुनिया की सबसे विश्वसनीय खिड़की

लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की किताब ‘मैं हिजड़ा मैं लक्ष्मी‘ मेरी सबसे प्रिय किताबों में एक है. लक्ष्मी ने किन्नर समुदाय की पहचान को एक नई ऊंचाई दी. आज वाणी प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब की समीक्षा कौशलेन्द्र प्रपन्न ने लिखी है- मॉडरेटर =================== आज मैं ऐसी किताब की चर्चा करने जा …

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क्यों जाएँ ‘जय गंगाजल’ देखने?

आज महाशिवरात्रि है. आज ‘जय गंगाजल’ फिल्म की समीक्षा पढ़िए. प्रकाश झा की फिल्म है, मानव कौल की एक्टिंग है, बिहार की राजनीति है. निजी तौर पर मुझे प्रकाश झा की किसी फिल्म ने कभी निराश नहीं किया. बहरहाल, इस फिल्म की एक अनौपचारिक, ईमानदार समीक्षा लिखी है युवा लेखिका …

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मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी ‘रक्स की घाटी और शबे फितना’

समकालीन हिंदी-लेखिकाओं में मनीषा कुलश्रेष्ठ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अलग-अलग परिवेश को लेकर, स्त्री-मन के रहस्यों को लेकर उन्होंने कई यादगार कहानियां लिखी हैं. उमें स्त्री-लेखन का पारंपरिक ‘क्लीशे’ भी कभी-कभी दिख जाता है तो कई बार वह उस चौखटे को तोड़कर बाहर भी निकल आती हैं. जो लोग यह …

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‘जुगनी’ की कहानी एक किस्म का आत्मअन्वेषण है

फिल्म ‘जुगनी’ पर युवा लेखिका अनु सिंह चौधरी जी ने इतना अच्छा लिखा है कि पढने के बाद मैं यह सोच रहा था कि फिल्म अब कहाँ देखी जा सकती है. वह ज़माना तो रहा नहीं जब फ़िल्में सिनेमा हॉल में हफ़्तों टिकी रहती थी. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर  ========================================== …

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