Home / Uncategorized

Uncategorized

‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की काव्यात्मक समीक्षा

लेखक-कवि यतीश कुमार ने काव्यात्मक समीक्षा की अपनी शैली विकसित की और हिंदी की अनेक श्रेष्ठ कृतियों की काव्यात्मक समीक्षा अब तक कर चुके हैं। इस बार उन्होंने विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की समीक्षा की है। आप भी पढ़ सकते हैं- ======================== 1. …

Read More »

भगत सिंह को बचाने वाली दुर्गा भाभी की कहानी

त्रिलोकनाथ पांडेय आजकल अपने उपन्यास ‘चाणक्य के जासूस’ के कारण चर्चा में हैं। वे भारत की गुप्तचर सेवा के आला अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने दुर्गा भाभी पर यह लिखा है। दुर्गा भाभी का नाम क्रांतिकारी आंदोलन में प्रमुखता से लिया जाता रहा है। भगत सिंह को गिरफ़्तारी से बचाने …

Read More »

संजीव पालीवाल के उपन्यास ‘नैना’ के बनने की कहानी

संजीव पालीवाल के उपन्यास ‘नैना’ की चर्चा लगातार बढ़ती जा रही है। वेस्टलैंड से प्रकाशित इस उपन्यास के बनने की कहानी पढ़िए- ============ इस उपन्यास का आपके हाथ में होना मेरे लिये एक सपने के पूरा होने के बराबर है। ये मेरी पिछले 25 साल की ख्वाहिश थी। ना जाने …

Read More »

‘मम्मी शिमला गई थीं ‘महाभोज’ लिखने के लिए’- रचना यादव

यह एक पुरानी बातचीत है रचना यादव से।संगीता ने रचनाजी  से यह बातचीत वेबपत्रिका लिटरेट वर्ल्ट के लिए अगस्त 2003 में की थी।रचना यादव हिन्दी की मशहूर कथा-लेखिका मन्नू भंडारी और बहुचर्चित लेखक-संपादक राजेन्द्र यादव की बेटी हैं। रचना को उसके मम्मी पापा और सभी जानने वाले टिंकू ही पुकारते हैं। रचना ने एडवर्टाइजिंग में मास …

Read More »

दिल्ली की सूफी दरगाहें और दिलों के राहत का सामान

आजकल दिल्ली में सड़कों पर दरबदर भटकते इंसान दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में दिल्ली की सूफ़ी दरगाहों की याद आई, जहां ग़रीबों को खाना खिलाना इबादत के हिस्से की तरह रहा है। यह सूफ़ी परम्परा का हिस्सा रहा है। जब इस परम्परा की याद आई तो प्रसिद्ध इतिहासकार रज़ीउद्दीन …

Read More »

कैलाश सत्यार्थी की तीन कविताएँ

बहुत कम लोग जानते हैं कि नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता श्री कैलाश सत्यार्थी कवि भी हैं। अपने मन के भावों- विचारों को शब्दों के माध्यम से वे अकसर व्यक्त करते रहते हैं। बाल शोषण के खिलाफ अपनी जन-जागरुकता यात्राओं और आंदोलन के गीत वे खुद रचते …

Read More »

गुजराती भाष की लेखिका कुंदनिका कापड़िया की कहानी ‘अवकाश’

कुंदनिका कापड़िया गुजराती की प्रसिद्ध लेखिका थीं। अभी पिछले हफ़्ते ही उनका निधन हो गया। उनकी एक कहानी का अनुवाद प्रस्तुत है। अनुवाद किया है प्रतिमा दवे शास्त्री ने- मॉडरेटर ==================== चिट्ठी लिखकर उसने टेबल पर रखी और घर की चाबी, किताब व पर्स लेकर निकल ही रही थी कि …

Read More »

इक्कीसवीं सदी के ग्रामीण यूनिवर्स की जातक उर्फ़ जात कथा का आख्यान

वरिष्ठ लेखक हृषीकेश सुलभ के उपन्यास ‘अग्निलीक’ को पढ़ते हुए यह टिप्पणी लिखी है जानी मानी लेखिका वंदना राग ने, हाल में ही जिनका उपन्यास आया है ‘बिसात पर जुगनू’। यह टिप्पणी दो पीढ़ियों का संवाद है – ======= अग्निलीक एक मुख्तलिफ़ सा उपन्यास है।  न सिर्फ अपने कलेवर और …

Read More »

नाज़ीवाद एक जन-आंदोलन था

1935 में जर्मन और यहूदी मूल के एक अमेरिकी पत्रकार, ‘मिल्टन मेयर‘ जर्मनी गए थे, हिटलर का साक्षात्कार लेने के मकसद से। “मैं इस राक्षसी शख़्स, इस ‘नाज़ी’ को देखना चाहता था। मैं उससे बात करना चाहता था, और उसे सुनना चाहता था। मैं उसे समझने की कोशिश करना चाहता …

Read More »

लेखिका वंदना टेटे को पांचवां शैलप्रिया स्मृति सम्मान

राँची से दिए जाने वाले प्रतिष्ठित शैलप्रिया स्मृति सम्मान की घोषणा हो गई है। पाँचवाँ सम्मान झारखंड की प्रसिद्ध लेखिका वंदना टेटे को देने की घोषणा की गई है- मॉडरेटर ============================== पांचवां शैलप्रिया स्मृति सम्मान झारखंड की सुपरिचित लेखिका वंदना टेटे को देने का निर्णय हुआ है। इस सम्मान के …

Read More »