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इस आवाज़ की अपनी एक कशिश है: प्रयाग शुक्ल

कवयित्री पारुल पुखराज की डायरी ‘आवाज़ को आवाज़ न थी’ पर यह टिप्पणी लिखी है जाने-माने कवि, कला समीक्षक प्रयाग शुक्ल जी ने। आप भी पढ़ सकते हैं- ===========================  पिछले दिनों पारुल पुखराज की पुस्तक ‘आवाज़ को आवाज़ न थी’’ (डायरी) मिली। तो स्वयं डायरी-विधा को लेकर कईं बातें ध्यान …

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मनोहर श्याम जोशी भाषा की हर भंगिमा में माहिर थे!

मनोहर श्याम जोशी जी की आज पुण्यतिथि है। आज उनको याद करते हुए मेरी एक छोटी सी टिप्पणी पढ़िए- प्रभात रंजन ================================== कुछ दिन पहले लेखक-आलोचक-पत्रकार आशुतोष भारद्वाज से बात हो रही थी। बात मनोहर श्याम जोशी के लेखन की होने लगी। मैंने कहा कि जोशी के उपन्यासों में जो …

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वर्तमान भारत न गांधी के सपनों का भारत है और न लोहिया के सपनों का

आज समाजवादी नेता डॉक्टर राम मनोहर लोहिया की जयंती है। इस अवसर पर पढ़िए कुमार मुकुल की लिखी किताब ‘डॉ लोहिया और उनका जीवन दर्शन’ पर युवा कवि देवेश पथ सारिया की टिप्पणी- =============== अपने शीर्षक के अनुरूप ही यह पुस्तक भारत में समाजवाद के अगुआ नेता डॉ राम मनोहर …

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आशकारा खानम कश्फ़ की नज़्म ‘डर तो लगता है’

आज पढ़िए उर्दू की संजीदा शायरा आशकारा खानम कश्फ़ की नज़्म- =================================== डर_तो_लगता_है   डर तो लगता है कोई पूछे तो, इस ज़माने में साफ़ कहने में, कुछ छुपाने में आईनों से, नज़र मिलाने में डर तो लगता है   डर तो लगता है ज़ब्त को अपने, आज़माने में ख़ुद …

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कवि चोर के लव जिहाद की कथा: मृणाल पाण्डे

चौरपंचाशिका से लेकर उत्तराखंड के लोकगीतों में विस्तृत कथाओं का रस घोल यह कथा तैयार की है जानी मानी लेखक मृणाल पाण्डे ने। बच्चों को न सुनाने लायक़ बाल कथाएँ सीरीज़ की यह 21 वीं कथा ज़रा देर से आई लेकिन लव जिहाद क़ानून की व्यथा के बीच चोर कवि …

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कविता शुक्रवार 20: निशांत की कविताएँ सोनम सिकरवार के चित्र

‘कविता शुक्रवार’ की इस बीसवीं प्रस्तुति में युवा कवि निशांत की कविताएं और सोनम सिकरवार के चित्र हैं। वर्ष 2008 में कविता के लिए प्रतिष्ठित भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार निशांत को दिया गया था। किसी एक कविता को आधार बना कर दिए जाने वाले इस पुरस्कार के लिए समकालीन भारतीय …

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झूठ की दुनिया में सत्य को आत्मसात करने के लिए यह किताब पढ़ें

अशोक कुमार पांडेय की किताब ‘उसने गांधी को क्यों मारा’ जब से प्रकाशित हुई है ऐसा लगता है जैसे सोशल मीडिया पर भूचाल आ गया हो। बहुत दिनों बाद किसी किताब का ऐसा स्वागत होते देखा है। यह पुस्तक बताती है कि हिंदी का नया पाठक अपने इतिहास के प्रसंगों …

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     ‘एनोला होम्स’: किताबों में छपे फोटो के कोलाज

 हाल में ही आई फ़िल्म एनोला होम्स’ पर यह टिप्पणी मनोज मल्हार ने लिखा है। मनोज पेशे से प्राध्यापक हैं और समसामयिक विषयों पर लिखते रहते हैं- =================  “वोट्स फॉर वीमेन, पब्लिक मीटिंग, मेक योर वर्डस हर्ड”  “प्रोटेस्ट अनरेस्ट एंड सिविल डिसऑबिडीएंस” ‘एनोला’ फिल्म में प्रयुक्त पर्चों की अपील.  “…जो …

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जीवन के तमाम उतार चढ़ावों को दर्शाती एक महत्वपूर्ण फिल्म

कोरियाई फ़िल्म ‘Spring, Summer, Fall, Winter and Spring’ की यह समीक्षा लिखी है सैयद तौहीद शाहबाज़ ने। समीक्षा पढ़कर 2003 में आई किम कू डुक इस फ़िल्म देखने की ख़्वाहिश जाग उठी- ================= पर्वतों के मनोरम दृश्यों के बीच बसे बौद्ध मठ में आपका स्वागत है। यह मठ अपने आप …

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पुष्यमित्र की किताब ‘रुकतापुर’ का एक अंश

लेखक-पत्रकार पुष्यमित्र की किताब आई है ‘रुकतापुर’। बिहार को लेकर लिखी गई इस किताब का एक चुनिंदा अंश पढ़िए। किताब का प्रकाशन राजकमल प्रकाशन समूह के उपक्रम सार्थक ने किया है। आप अंश पढ़ सकते हैं- ====================== किताब के बारे में – यह किताब एक सजग-संवेदनशील पत्रकार की डायरी है, …

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