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जनाब इश्क़ और ‘बिज़नेस’ कहीं पाबंदियों से रुके हैं ?

आज दीवाली की मुबारकबाद के साथ सुहैब अहमद फ़ारूक़ी का यह व्यंग्य- ============================== नोट: यह सिर्फ व्यंग्य है। इसे गंभीरता से और आधिकारिक तौर पर लेना प्रतिबंधित है। हज़रात! आप को और आपके अपनों को दीवाली की पुरख़ुलूस मुबारकबाद! जैसा कि आपको वाज़ेह है कि ख़ाकसार एक सरकारी नौकर है …

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यात्राओं का स्मरण : पृथ्वी गंधमयी तुम

वरिष्ठ लेखक-पत्रकार अनुराग चतुर्वेदी का यात्रा-संस्मरण प्रकाशित हुआ है ‘पृथ्वी गंधमयी तुम’। राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब पर युवा शोधार्थी नीरज की यह टिप्पणी पढ़िए- ====================== अंग्रेज़ी की साहित्यिक विधा ट्रैवलॉग (travelogue) के लिए हिंदी में अनेक पदों का प्रयोग किया जाता रहा है। यात्रा-वृत्तांत, यात्रा-आख्यान, यात्रा-वृत्त, यात्रा-संस्मरण आदि। …

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जी का था ख़याल तो काहे जी लगाया

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पेशे से पुलिस अधिकारी हैं मिज़ाज से शायर। लेकिन आज उनका यह चुटीला लेख पढ़िए- ======================= ‘जी का बुरा हाल है जब से जी लगाया तुझे जी में बसाया तेरे हो लिए जी का था ख़याल तो काहे जी लगाया मुझे जी में बसाया ए जी बोलिये …

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