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कलरव में सुबह चुप है

नंदकिशोर आचार्य ऐसे कवि हैं जो शोर-शराबे से दूर रहकर साधना करने में विश्वास करते हैं. अनेक विधाओं में सिद्धहस्त आचार्य जी मूलतः कवि हैं. अभी हाल में ही वाणी प्रकाशन से उनका नया संग्रह आया है ‘गाना चाहता पतझड़’ कविताएँ. उसकी कुछ कविताएं- जानकी पुल. १. उसकी नहीं हुई …

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लेखक समाज और जनता का चौकीदार होता है

कुंवर नारायण के किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है. ८० पार की उम्र हो गई है लेकिन साहित्य-साधना उनके लिए आज भी पहली प्राथमिकता है. भारत में साहित्य के सबसे बड़े पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजे जा चुके इस लेखक से शशिकांत ने बातचीत की. प्रस्तुत है आपके लिए- जानकी …

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इतिहास-पुरुषों की बतकही और काशी

युगान्तकारी लेखक जयशंकर प्रसाद और उनके युग को आधार बनाकर श्यामबिहारी श्यामल ने उपन्यास लिखा है, जिसमें बनारस का वह युग जीवंत रूप से उपस्थित दिखाई देता है जब वहां प्रसाद थे, रामचंद्र शुक्ल थे, आचार्य केशव प्रसाद मिश्र थे, प्रेमचंद थे और बनारसी बतकही की मस्ती थी. प्रस्तुत है …

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