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कुशाग्र अद्वैत की कुछ नई कविताएँ

कुशाग्र अद्वैत बीएचयू में बीए के छात्र हैं और बहुत अच्छी कविताएँ लिखते हैं। उनकी कुछ नई कविताएँ पढ़िए- ================= चाहना   जो आवाज़ देगा वो चाहेगा आप पहुँचे   जो पुष्प देगा वो चाहेगा आप खिल उठें   जो घड़ी देगा वो चाहेगा आपका वक़्त   जो जूते देगा …

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जेंडर डिस्कोर्स में अंततः पुरुष ही हीरो बनता है

अनुभव सिन्हा की फ़िल्म ‘थप्पड़’ पर यह सुविचारित टिप्पणी लिखी है युवा लेखक-पत्रकार फ़िरोज़ खान ने- =================== हिंदी में हम जिस तरह का सिनेमा देखते रहे हैं, उसमें सांप्रदायिकता पर भी बात हुई है, जाति पर भी और जेंडर पर भी। सांप्रदायिकता और जाति पर काफी फिल्में हैं। कुछ बहुत …

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अनुपम ओझा की कहानी ‘बाँस का पुल’

अनुपम ओझा ने हिंदी सिनेमा पर शोध किया है, फ़िल्मी दुनिया से जुड़े रहे हैं। मूलतः बनारसी हैं। या उनकी कहानी है इसमें भी बनारस को पहचानिए- ===================== बाबतपुर हवाई अड्डे से सारनाथ तक दिमाग में एक ही घंटी बजती रही… आदिकेशव! सबसे पहले आदिकेशव घाट जाना है। गेस्ट हाउस …

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