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कृष्णा सोबती उनकी जीजी थीं

हंस पत्रिका का अप्रैल अंक कृष्णा सोबती की स्मृति को समर्पित था, जिसका सम्पादन अशोक वाजपेयी जी ने किया है। इस अंक में कृष्णा जी को याद करते हुए उनकी भतीजी ने एक आत्मीय संस्मरण लिखा है जिसका अंग्रेज़ी से अनुवाद मैंने किया है। आपने न पढ़ा तो तो पढ़िएगा- …

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सुरेन्द्र मोहन पाठक और उनका नया उपन्यास ‘क़हर’

मैं पहले ही निवेदन करना चाहता हूँ कि मैं सुरेन्द्र मोहन पाठक के अनेक उपन्यास पढ़े ज़रूर हैं लेकिन उनका फ़ैन नहीं रहा। लेकिन उनके विमल सीरिज़ की बात ही कुछ और है। विमल, जो क़ानून की नज़र में अपराधी है लेकिन वह एक ऐसा किरदार है जिससे आपको प्यार …

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अरविंद दास का लेख ‘बेगूसराय में ‘गली बॉय’

बिहार के बेगूसराय का चुनाव इस बार कई मायने में महत्वपूर्ण है।कन्हैया कुमार जहाँ भविष्य की राजनीति की उम्मीद हैं तो दूसरी तरफ़ उनका पारम्परिक राजनीति की दो धाराओं द्वारा विरोध किया जा रहा है। जीत हार बाद की बात है लेकिन यह चुनाव विचारधारों के संघर्ष का एक बड़ा …

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