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एक ही पृथ्वी पर कितने बनारस

आज सुबह सुबह आलोचक-प्रोफ़ेसर पंकज पराशर का यह लेख पढ़ा। पढ़ते ही साझा करने का ऐसा मन हुआ कि एयरपोर्ट पर बैठे बैठे आज पहली बार फ़ोन से पोस्ट कर रहा हूँ। मैं यात्रा में हूँ, आप इस लेख के साथ परतदार बनारस की यात्रा कीजिए- प्रभात रंजन ——————————————————————- संतों-असंतों …

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नाज़ीवाद एक जन-आंदोलन था

1935 में जर्मन और यहूदी मूल के एक अमेरिकी पत्रकार, ‘मिल्टन मेयर‘ जर्मनी गए थे, हिटलर का साक्षात्कार लेने के मकसद से। “मैं इस राक्षसी शख़्स, इस ‘नाज़ी’ को देखना चाहता था। मैं उससे बात करना चाहता था, और उसे सुनना चाहता था। मैं उसे समझने की कोशिश करना चाहता …

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अनुकृति उपाध्याय की कहानी ‘अमुक शहर का हाथी’

युवा लेखिका अनुकृति उपाध्याय की यह कहानी समकालीन संदर्भों में बहुत अर्थगर्भित है। एक पोलिटिकल कहानी। मूल कहानी अंग्रेज़ी में The Curious Reader पर प्रकाशित हुई थी, जिसका अनुवाद स्वयं लेखिका ने किया है- अमुक शहर का हाथी– मॉडरेटर ================= अमुक शहर का हाथी ‘उन्होंने हमारे हाथी का अपमान किया …

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