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न कोई वास्को डि गामा होता न कोलंबस और न कोई इब्ने बतूता!

प्रज्ञा मिश्रा ने प्रवास के अनुभवों को लेकर बहुत दार्शनिक लेख लिखा है। वह इंग्लैंड में रहती हैं और जानकी पुल सहित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लिखती रहती हैं- ========== देवदास (संजय लीला भंसाली वाली) फिल्म में देवदास पारो से कहता है, “लंदन की तो बात ही कुछ और है, बड़े …

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उन्नीसवीं शताब्दी ‘स्त्री दर्पण’ और स्त्री शिक्षा

सुरेश कुमार 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और 20 वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में स्त्रियों से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते रहे हैं। उनका शोध भी इसी काल पर है। इस लेख में उन्होंने 19 वीं शताब्दी के सातवें दशक में प्रकाशित पुस्तक ‘स्त्री दर्पण’ पर लिखा है। यह बताया है …

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हमारा सिनेमा और कहानियाँ बदल रही हैं

हाल में ओटीटी प्लेटफ़ोर्म पर प्रदर्शित कुछ फ़िल्मों, वेब सीरिज़ को लेकर यह लेख लिखा है भूमिका सोनी ने।  भूमिका दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स में पढ़ाई करने के बाद एक बहुराष्ट्रीय बैंक में काम करती हैं और अलग अलग विषयों पर लिखती रहती हैं- ============= भारतीय सिनेमा में हीरो होना अलग …

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