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निवेदिता की कहानी ‘मैं पगली ऐसी जली कोयला भई न राख’

निवेदिता जी सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। आम लोगों के जीवन को बड़े क़रीब से देखती हैं। जीवंत कहानियाँ लिखती हैं। जैसे यह कहानी। मिथिला की परम्परा, स्त्रियों के मन की कसक की एक बेजोड़ कहानी है। आप भी पढ़िए। अच्छा लगेगा- ============= टैक्सी कोसी नदी पर बने पुल से निकल कर …

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कवि वीरेन डंगवाल का स्मरण

आज कवि वीरेन डंगवाल की पुण्यतिथि है। उनको स्मरण करते हुए यह टिप्पणी की है कवि-कथाकार-पत्रकार हरि मृदुल ने- =============== ‘मैं तो सतत रहूंगा तुम्हारे भीतर नमी बनकर, जिसके स्पर्श मात्र से जाग उठा है जीवन मिट्टी में’ ० हरि मृदुल कविता के प्रति तीव्र उत्कंठा-उत्सुकता के दिन थे वे। …

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ज़रूरी सवालों और संकटों को संबोधित करती कहानियां:संजीव कुमार

अशोक कुमार पांडेय को लेखक के रूप में मैं उनकी इस कहानी के लिए भी याद रखता हूँ, ‘इस देश में मिलिट्री शासन लगा देना चाहिए’, अपने कथ्य में ही नहीं अपनी कला में भी यह कहानी अपने कथ्य में ही नहीं अपनी कला में भी यह कहानी बहुत अच्छी …

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