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इक्कीसवीं सदी के ग्रामीण यूनिवर्स की जातक उर्फ़ जात कथा का आख्यान

वरिष्ठ लेखक हृषीकेश सुलभ के उपन्यास ‘अग्निलीक’ को पढ़ते हुए यह टिप्पणी लिखी है जानी मानी लेखिका वंदना राग ने, हाल में ही जिनका उपन्यास आया है ‘बिसात पर जुगनू’। यह टिप्पणी दो पीढ़ियों का संवाद है – ======= अग्निलीक एक मुख्तलिफ़ सा उपन्यास है।  न सिर्फ अपने कलेवर और …

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कुशाग्र अद्वैत की कुछ नई कविताएँ

कुशाग्र अद्वैत बीएचयू में बीए के छात्र हैं और बहुत अच्छी कविताएँ लिखते हैं। उनकी कुछ नई कविताएँ पढ़िए- ================= चाहना   जो आवाज़ देगा वो चाहेगा आप पहुँचे   जो पुष्प देगा वो चाहेगा आप खिल उठें   जो घड़ी देगा वो चाहेगा आपका वक़्त   जो जूते देगा …

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जेंडर डिस्कोर्स में अंततः पुरुष ही हीरो बनता है

अनुभव सिन्हा की फ़िल्म ‘थप्पड़’ पर यह सुविचारित टिप्पणी लिखी है युवा लेखक-पत्रकार फ़िरोज़ खान ने- =================== हिंदी में हम जिस तरह का सिनेमा देखते रहे हैं, उसमें सांप्रदायिकता पर भी बात हुई है, जाति पर भी और जेंडर पर भी। सांप्रदायिकता और जाति पर काफी फिल्में हैं। कुछ बहुत …

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