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चुन-चुन खाइयो मांस: आमिस  

असमिया भाषा की फ़िल्म ‘आमिस’ पर यह टिप्पणी युवा लेखक-पत्रकार अरविंद दास ने लिखी है- मॉडरेटर ============== एक बार मैं एक दोस्त के साथ खाना खा रहा था. अचानक से दाल की कटोरी से उसने झपटा मार के कुछ उठाया और मुँह में डाल लिया. जब तक मैं कुछ समझता, हँसते …

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क्यों नहीं हो रहा हिंदी में इतिहास-लेखन

जाने-माने इतिहासकार रजीउद्दीन अक़ील ने इस लेख में बहुत गम्भीर सवाल उठाया है कि इतिहास लेखन हिंदी में क्यों नहीं हो रहा? इतिहासकारों के सामने यह बड़ा सवाल है कि उन्होंने कभी इस दिशा में कोई ठोस काम क्यों नहीं किया? रज़ी साहब का यह लेख पहले ‘नवजीवन’ में प्रकाशित …

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रितुपर्णो घोष की फ़िल्म ‘शुभो मुहूर्त’ पर विजय शर्मा का लेख

रितुपर्णो घोष की फ़िल्में उपन्यास की तरह होती हैं। किसी क्लासिक उपन्यास की तरह बार बार थोड़ा-बहुत देखने लायक़। ‘शुभो मुहूर्त’ तो अगाथा क्रिश्टी के उपन्यास पर आधारित है और रितुपर्णो द्वारा निर्देशित एकमात्र मर्डर मिस्ट्री है। इस फ़िल्म पर विजय शर्मा का लेख पढ़िए। यह उनकी आगामी किताब का …

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