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पाब्लो का प्रेमी तथा अन्या कविताएँ: अमृत रंजन

किशोर कवि अमृत रंजन अब धीरे धीरे वयस्क हो रहा है और उसकी कविताएँ भी अपना रंग बदल रही हैं। ये उसकी सबसे नई कविताएँ हैं- प्रभात रंजन =================== पाब्लो का प्रेमी  कितना प्रेम है? बहुत ज़्यादा। कहाँ तक?  बहुत दूर। कश्मीर तक? हाँ। इटली तक?  हाँ। अमरीका तक?  हाँ। …

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गांधी का कला व सौंदर्य दर्शन पूर्णतः प्रकृति से उपजा सच था

कलाओं को गांधी ने किस तरह से प्रेरित किया इसको लेकर एक छोटा सा लेख लिखा है कलाकार-लेखक राजेश्वर त्रिवेदी ने-मॉडरेटर ==================================================== गांधी ने भी अन्य लोगों की तरह एक सीधे,सरल और बेहद विनय पूर्ण ढंग से कला को आत्म की अभिव्यक्ति कहकर संबोधित किया है। विभिन्न कलाओं को लेकर …

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इमरोज से वे कहतीं – आग तुम जलाओ और रोटी मैं बनाती हूँ

संस्मरण के इस भाग में फिर मिलते हैं इमरोज से। देखते हैं कि एक भावुक व्यक्ति, एक भावुक कलाकार कैसे प्रेम–प्यार, व्यक्ति, परिवार और समाज को देखता है। अमृता के विषय में लम्बी बातचीत करने के बाद जब इमरोज से मैंने उन दोनों की तस्वीरें मांगी, थोड़ी देर बाद ही …

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