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आकांक्षा पारे की कहानी ‘सखि साजन’

समकालीन लेखिकाओं की सीरिज में आज आकांक्षा पारे की कहानी. उनकी कहानियां स्त्री लेखन के क्लीशे से पूरी तरह से मुक्त है. उनकी कहानियों में एक अन्तर्निहित व्यंग्यात्मकता है जो उनको अपनी पीढ़ी में सबसे अलग बनाती है. आप भी पढ़िए उनकी एक प्रतिनिधि कहानी- मॉडरेटर  ============================================================== ‘यह कहानी उतनी …

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पतनशील पत्नियों के नोट्स

नीलिमा चौहान ने हाल के वर्षों में स्त्री-अधिकारों, स्त्री शक्ति से जुड़े विषयों को लेकर बहुत मुखर होकर लिखा है और अपनी एक बड़ी पहचान बनाई है. उनके लेखन में किसी तरह का ढोंग नहीं दिखता बल्कि एक तरह की गहरी व्यंग्यात्मकता है जो हम लोगों को बहुत प्रभावित करती …

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ऋत्विक घटक का सिनेमा सदा प्रासंगिक रहेगा

40 साल पहले इसी महीने जीनियस फिल्मकार ऋत्विक घटक का देहांत हुआ था. आज उनकी शख्सियत को, उनके सिनेमा को याद करते हुए एक सुन्दर लेख सैयद एस. तौहीद ने लिखा है- मॉडरेटर  ================================= सात फरवरी 1976 कलकत्ता की सुबह को ऋत्विक घटक की असामयिक मौत ने झकझोर दिया था.पूरे …

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