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आप याद आएंगे आलोक जैन!

शहरयार को अमिताभ बच्चन के साथ ज्ञानपीठ पुरस्कार देते आलोक जैन श्री आलोक प्रकाश जैन का जाना हिंदी सेवी व्यापारियों की उस आखिरी कड़ी का टूट जाना है जिसने हिंदी के उत्थान के लिए, उसकी बेहतर संभावनाओं के विकास के लिए आजीवन काम किया. वे साहू शांति प्रसाद जैन के …

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मनीषा पांडे की नई कविताएं

समकालीन हिंदी कविता पर समसामयिकता का दबाव इतन अधिक हो गया है, विराट का बोझ इतना बढ़ गया है कि उसमें निजता का स्पेस विरल होता गया है. मनीषा पांडे की इस नई कविता श्रृंखला को पढ़ते हुए लगा कि और कहीं हो न हो कविता में इस उष्मा को बचाए …

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‘लखनऊ बॉय’ विनोद मेहता का स्मरण

विनोद मेहता का जाना पत्रकारिता के एक मजबूत स्तम्भ का ढह जाना है. उस स्तम्भ का जिसके लिए पत्रकारिता एक मूल्य था, सामाजिक जिम्मेदारी थी. उनकी आत्मकथात्मक पुस्तक ‘लखनऊ बॉय’ के बहाने उनकी पत्रकारिता का बेहतर मूल्यांकन किया है जाने-माने लेखक प्रेमपाल शर्मा ने- मॉडरेटर  ============================================================ 1941 में मौजूदा पाकिस्‍तान …

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