Recent Posts

मई महीने से तरक्की की चिड़िया ने पंख फड़फड़ाए

सदफ नाज़ फिर हाज़िर हैं. समकालीन राजनीतिक हालात पर इतना गहरा व्यंग्य शायद ही कोई लिखता हो. आम तौर पर लेखिकाओं के बारे में यह माना जाता है कि उनको राजनीति की समझ जरा कम होती है, तो मेरा कहना है कि उनको सदफ नाज़ के व्यंग्य पढने चाहिए- प्रभात …

Read More »

मैं बहुत कम किसी से मिलता हूँ/ जिससे यारी है उससे यारी है

आज अख्तर नज्मी की कुछ ग़ज़लें. इनके बारे में इतना ही पता है कि इनका जन्म 1930 में हुआ और 1997 में इंतकाल. आज प्रचण्ड प्रवीर की इस प्रस्तुति का लुत्फ़ लीजिये और इस शदार शायर के बारे में हमारा ज्ञानवर्धन कीजिए- मॉडरेटर  =========== जो भी मिल जाता है घर …

Read More »

इतिहास की सच्ची अदायगी है ‘हैदर’

‘हैदर’ फिल्म जब से आई है तब से तब से उसकी कई ख़ूबसूरत समीक्षाएं पढ़ी. एक साझा भी किया था. कल युवा साथी मोहम्मद अनस की लिखी यह समीक्षा भी उनके ब्लॉग पर देखी थी. चाहता तो था कि आज सुबह ही साझा करूँ. लेकिन दिल्ली से बाहर होने के …

Read More »