Recent Posts

मुस्कुराइए कि आपके आ गए दिन अच्छे

नीलिमा चौहान को हम सब भाषा आन्दोलन की एक मुखर आवाज के रूप में जानते-पहचानते रहे हैं. लेकिन उनके अंदर एक संवेदनशील कवि-मन भी है इस बात को हम कम जानते हैं. उनकी चार कविताएँ आज हम सब के लिए- मॉडरेटर  =========================== स्माइल  अंडर  सर्विलेंस मुस्कुराइए कि आप अंडर सर्विलेंस …

Read More »

हिमालय न देखा हो तो ‘दर्रा दर्रा हिमालय’ पढ़ लीजिए

‘दर्रा दर्रा हिमालय’ ऐसी किताब नहीं है जिसमें हिमालय की गोद में बसे हिल स्टेशनों की कहानी हो, जिसे पढ़ते हुए हम याद करें कि अरे नैनीताल के इस होटल में तो हम भी ठहरे थे, शिमला के रेस्तरां में बैठकर हमने भी मॉल का नजारा लिया था. हमने भी …

Read More »

जेड प्लस इंटेलेक्चुअल फिल्म नहीं, इंटेलिजेंट फिल्म है!

यह शाम की रिव्यू है. जो सुबह से थोड़ी अलग है और कुछ कुछ उस जैसी भी है. जेड प्लस फिल्म ही ऐसी है कि हर लेखक का अपना अपना पाठ तैयार है. यह पाठ है प्रसिद्ध युवा लेखिका अनु सिंह चौधरी का. असल में करोड़ करोड़ खेलने वाली फिल्मों …

Read More »