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सौ साल बाद ‘उसने कहा था’

‘उसने कहा था’ कहानी के सौ साल पूरे होने वाले हैं. इसके महत्व को रेखांकित करते हुए युवा लेखक मनोज कुमार पाण्डेय ने एक बहुत अच्छा लेख लिखा है. मैं तो पढ़ चुका आप भी पढ़िए- प्रभात रंजन  ============================================================ ‘उसने कहा था’ पहली बार सरस्वती में जून 1915 में प्रकाशित …

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जनवादी लेखक संघ और वाम लेखकों के बीच एक रोचक और गंभीर बहस!

पता नहीं आप लोगों का इसके ऊपर ध्यान गया कि नहीं वाम विचारक श्री अरुण महेश्वरी ने जनवादी लेखक संघ के नेतृत्व के नाम एक खुला पत्र अपने फेसबुक वाल पर जारी किया. उसके बाद जनवादी लेखक संघ के उप-महासचिव संजीव कुमार का एक पत्र जारी हुआ और उसके बाद …

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राजेश खन्ना की कामयाबी एक मिसाल है- सलीम खान

80 के दशक में जब हम बड़े हो रहे थे तो हमारे सामने सबसे बड़ा डाइलेमा था कि कपिल देव सबसे बड़े क्रिकेट खिलाड़ी हैं या सुनील गावस्कर. 70 के दशक में हमारे मामाओं-चाचाओं के लिए डाइलेमा दूसरा था- राजेश खन्ना या अमिताभ बच्चन. याद आया यासिर उस्मान की पुस्तक ‘राजेश …

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