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बिसरे संगीतकार की भूली याद

भारतीय सिनेमा के सुनहरे संगीतमय दौर के “वो तेरे प्यार का गम, एक बहाना था सनम” और ”जिक्र होता है जब कयामत का तेरे जलवों की बात होती है” का कालजयी संगीत रचने वाले संगीतकार दान सिंह कभी गायकों और गीतकारों के चहेते रहे तो कभी गुमनामी में रहे, पर जिसने भी ऐसे गीतों को …

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जहाँ ‘अलग दिखना और अलग होने में फर्क था’

इन दिनों अल्पना मिश्र के उपन्यास ‘अन्हियारे में तलछट चमका’ की बड़ी चर्चा है. आम तौर पर किसी साहित्यिक कृति की ज्यादा चर्चा होती है तो संदेह होने लगता है कि मामला प्रायोजित तो नहीं. वैसे भी अल्पना जी ‘फील गुड टाइप लेखिका हैं. इससे ज्यादा उनके लेखन को मैंने …

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मैं साहित्य की एक्स्ट्रा कैरीक्यूलर एक्टीविटीज़ में बहुत कमजोर रहा

13 सितम्बर को दिवंगत कवि भगवत रावत की जयंती थी. जीवन की आपाधापी में हम इतने उलझ गए हैं कि सही समय पर हम अपने वरिष्ठों को याद भी नहीं कर पाते. बहरहाल, आज उनकी स्मृति को प्रणाम करते हुए उनके एक पुराने साक्षात्कार का सम्पादित रूप दे रहे हैं …

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