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अविनाश मिश्र की कविताएं

हरेप्रकाश उपाध्याय के संपादन में निकली पत्रिका ‘मंतव्य’ की वाह-वाह हो रही है लेकिन यह लिखने वाले कम लोग हैं कि इस पत्रिका में छपी रचनाओं में अच्छा क्या है. सोशल मीडिया की वाह-वाह ऐसी ही होती है. बहरहाल, इस पत्रिका पर मैं विस्तार से बाद में लिखूंगा. पहले युवा …

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आत्मालोचन के खाद-पानी से मनुष्य-धर्म समृद्ध होता है

यु. आर. अनंतमूर्ति के उपन्यास ‘संस्कार’ को कन्नड़ भाषा के युगांतकारी उपन्यास के रूप में देखा जाता है, वह सच्चे अर्थों में एक भारतीय उपन्यास माना जाता है, जिसने भारतीय समाज के मूल आधारों पर सवाल उठाया. उनको श्रद्धांजलिस्वरूप उस उपन्यास पर प्रसिद्ध आलोचक रोहिणी अग्रवाल का यह लेख- मॉडरेटर  ================================================================ …

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मल को कमल बनानेवाले पुराणकार आचार्य रामपदारथ शास्त्री की जय हो!

आलोचक संजीव कुमार इन दिनों किसी ‘सबलोग’ नामक पत्रिका में व्यंग्य का एक शानदार स्तम्भ लिखते हैं ‘खतावार’ नाम से. अब चूँकि वह पत्रिका कहीं दिखाई नहीं देती है इसलिए हमारा कर्त्तव्य बनता है कि अनूठी शैली में लिखे गए इन व्यंग्य लेखों को आप तक पहुंचाएं. यह नया है …

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