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गुलजार की पहुँच हर पीढ़ी, हर दिल तक है!

गुलजार शायद ऐसे अकेले लेखक-कलाकार हैं जिनसे हर उम्र, हर सोच के लोग गहरे मुतास्सिर हैं. जीते जी वे एक ऐसे मिथक में बदल गए हैं सब जिनके मानी अपन अपने ढंग से समझना चाहते हैं. यकीन न हो तो इस युवा लेखक अंजुम शर्मा का लेख पढ़ लीजिये और …

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लखनऊ और अमृतलाल नागर दोनों एक दूसरे के लिए बने थे!

आज हिंदी के विलक्षण गद्यकार अमृतलाल नागर की जयंती है. नागर जी की स्मृति को प्रणाम करते हुए लखनवी ठाठ के इस लेखक पर समकालीन लेखक दयानंद पाण्डेय का यह लेख पढ़िए, जो बड़ी रोचक शैली में लिखा गया है- मॉडरेटर  ============================= कहना बहुत कठिन है कि अमृतलाल नागर(1916 -1990) का …

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क्रिकेट खेल, धर्म और राजनीति का सम्मिश्रण था

आजादी से पहले के दौर में अंग्रेजों ने किस तरह क्रिकेट के खेल का राजनीतिक इस्तेमाल किया इसको समझने के लिए रामचंद्र गुहा की किताब ‘विदेशी खेल अपने मैदान पर’ पढने लायक है. उसी का एक सम्पादित अंश क्रिकेट और साम्प्रदायिकता को लेकर- मॉडरेटर ========================================= बंबई का वार्षिक क्रिकेट उत्सव, युद्ध …

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