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हंगारी कवि अतिला यूसुफ की कविताएँ

हंगारी कवि अतिला यूसुफ की कविताएँ: मेरा कोई पिता नहीं, न माँ, न ईश्‍वर, न देश, न झूला, न कफन , न चुंबन और न ही प्‍यार। तीन दिनों से मैंने खाया नहीं, कुछ भी नहीं। मेरे 20 साल एक ताकत हैं। मेरे ये बीस साल बिकाऊ हैं। यदि खरीदनेवाला कोई …

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‘मार्क्स के संस्मरण’ किताब से एक अंश

पॉल लाफार्ज और विल्हेम लीबनेख्त द्वारा लिखे गए ‘मार्क्स के संस्मरण‘ के हिंदी अनुवाद से वहीं परिचय हुआ. पॉल लाफार्ज मार्क्स के दामाद थे. इसलिए ये संस्मरण बड़े आत्मीय और विश्वसनीय लगते हैं. पुस्तक का हिंदी अनुवाद किया है हरिश्चंद्र ने और प्रकाशक हैं जन-प्रकाशन गृह, मुंबई. यह संस्मरण ‘हिंदी …

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बहन के सहारे भाई खोजते रहे जीवन की नायिकाएं

आज भाई दूज पर कुछ कविताएँ बहनों के लिए. कवि हैं प्रेमचंद गाँधी- जानकी पुल. बहन बहन मां की कोख से पैदा हुई लड़की का ही नाम नहीं है उस रिश्‍ते का भी नाम है जो पुरुष को मां के बाद पहली बार नारी का सामीप्‍य और स्‍नेह देता है …

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