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विस्‍मृति के गर्त में अकेले जा रहे हैं हम

कवि-आलोचक और ललित कला अकादमी के अध्‍यक्ष सुप्रसिद्धअशोक वाजपेयी आज सत्तर साल के हो गए. इस अवसर पर उनसे प्रसिद्ध पत्रकार-संस्कृतिकर्मी अजित राय ने उनसे कुछ खरी-खरी बातें कीं. प्रस्तुत है आपके लिए- जानकी पुल. 16 जनवरी 2011 को आप 70 साल के हो रहे हैं। लगभग 50 साल की …

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बग़ैर शब्दों के बोलना है एक भाषा में

पीयूष दईया की कविताओं को किसी परंपरा में नहीं रखा जा सकता. लेकिन उनमें परंपरा का गहरा बोध है. उनकी कविताओं में गहरी दार्शनिकता होती है, जीवन-जगत की तत्वमीमांसा, लगाव का अ-लगाव. पिता की मृत्यु पर लिखी उनकी इस कविता-श्रृंखला को हम आपके साथ साझा करने से स्वयं को रोक …

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तोहरे बर्फी ले मीठ मोर लबाही मितवा!

लोक-गायक बालेश्वर के निधन को लेकर ज्ञानपीठ वाले सुशील सिद्धार्थ से चर्चा हो रही थी तो उन्होंने बताया कि दयानंद पांडे ने उनके ऊपर उपन्यास लिखा था ‘लोक कवि अब गाते नहीं’. बाद में जब युवा कवि-आलोचक-संपादक सत्यानन्द निरुपम से चर्चा हुई तो उन्होंने बताया कि यह उपन्यास उनके पास …

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