Recent Posts

किन्नर कौन होते हैं?

प्रसिद्ध लेखक एस. आर. हरनोट की कहानियां अक्सर हमें कुछ सोचने के लिए विवश करती हैं. उनकी अनेक कहानियों में हिमाचली संस्कृति, वहां की परम्पराओं के प्रति गहरी चिंता दिखाई देती है. आज उनकी एक कहानी ‘किन्नर’. किस तरह किन्नौर के लोगों के लिए प्रयुक्त होने वाला यह शब्द कालांतर …

Read More »

सब ठीक-ठाक ही दीखता है इस अल्लसुबह…

अपर्णा मनोज की कविताओं का मुहावरा एकदम अलग से पहचान में आता है. दुःख और उद्दाम भावनाओं के साथ एक गहरी बौद्धिकता उनकी कविताओं का एक अलग ही मुकाम बनाती हैं.  कई-कई सवाल उठाने वाली ये कविताएँ मन में एक गहरी टीस छोड़ जाती हैं. आज प्रस्तुत हैं उनकी पांच …

Read More »

ज्ञानी होइ सो अरथु लगावै, मुरख होइ उठि जाइ

युवा इतिहासकार सदन झाकी पकड़ शास्त्र और लोक दोनों पर ही समान रूप से और गहरी है. लोक-ज्ञान पर इस लेख को पढकर इसकी ताकीद की जा सकती है. आधुनिक औपचारिक शिक्षा से अलग  ज्ञान की एक संचित परंपरा रही है, जिससे हमारा नाता टूटता जा रहा है. उन्हीं टूटे …

Read More »