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यह अघोषित आपातकाल का समय है

कुछ लेखक ऐसे होते हैं जिनके पुरस्कृत होने से पुरस्कारों की विश्वसनीयता बनी रहती है. ऐसे ही  लेखक उदय प्रकाश से दिनेश कुमार की बातचीत आप हिन्दी के साहित्यिक सत्ता केन्द्रों के प्रति आक्रामक रहे हैं। साहित्यिक पुरस्कारों में इनकी अहम भूमिका होती है। बावजूद इसके आपको साहित्य अकादमी पुरस्कार …

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मीडिया से राडिया तक

प्रसिद्ध पत्रकार-मीडिया विश्लेषक दिलीप मंडलजी का यह लेख ‘पाखी’ के मीडिया विशेषांक में प्रकाशित हुआ है. लेख इतना अच्छा और ज़रूरी लगा कि सोचा आपसे साझा किया जाए. हम दिलीपजी के आभारी हैं कि उन्होंने लेख के शीर्षक में किंचित बदलाव के साथ हमें प्रकाशित करने की अनुमति दी- जानकी …

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जीवन को छलता हुआ, जीवन से छला गया

आज मोहन राकेश का जन्मदिन है. हिंदी को कुछ बेजोड़ नाटक और अनेक यादगार कहानियां देने वाले मोहन राकेश ने यदा-कदा कुछ कविताएं भी लिखी थीं. उनको स्मरण करने के बहाने उन कविताओं का आज वाचन करते हैं- जानकी पुल. १. कुछ भी नहीं  भाषा नहीं, शब्द नहीं, भाव नहीं, कुछ …

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