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दोस्ती के रंग – यादवी के ढंग

प्रसिद्ध लेखिका अर्चना वर्मा का यह लेख राजेंद्र यादव की पुस्तक ‘स्वस्थ आदमी के बीमार विचार’ के सन्दर्भ में लिखा गया है- जानकी पुल. ======================== सुना है, राजेन्द्र जी से ही, कि महाभारत को मराठी में ‘यादवी’ कहते हैं और कुछ नंगई कुछ गुण्डई के अर्थ में ‘यादवी‘ मचा के रखना …

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उम्मीदों के चराग गलियों में रोशन हो रहे हैं

बीते साल की दस प्रमुख नाट्य प्रस्तुतियों पर लिखा है युवा आलोचक-शोधार्थी अमितेश कुमार ने- जानकी पुल. ======= ======= साल का अंत एक दुखद नोट के साथ हुआ लेकिन उम्मीदों के चराग गलियों में रोशन हो रहे है. दिल्ली के जंतर मंतर और दुर्भेध बना दिया गए इंडिया गेट के अलावा …

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संवादहीनता एक बड़ी समस्या न बन जाए

दिल्ली में सामूहिक बलात्कार के बाद शुरु हुए आंदोलन को लेकर वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र धोड़पकर ने बहुत बहसतलब लेख लिखा है- जानकी पुल. =========================  राजनीति और समाज के बारे में भविष्यवाणी करना खतरनाक होता है। जब देश में टेलीविजन और संचार साधनों की आमद हुई, तो समाजशास्त्रियों व कुछ राजनीतिज्ञों …

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