Recent Posts

चेतना पारीक, कैसी हो?

कवि ज्ञानेंद्र पति इसी महीने चुपचाप साठ साल के हो गए. इस अवसर पर मुझे उनकी कविता ‘ट्राम में एक याद’ का स्मरण हो आया. जब नौवें दशक में इस कविता का प्रकाशन हुआ था तो इसकी खूब चर्चा हुई थी. केदारनाथ सिंह के संपादन में हिंदी अकादेमी, दिल्ली से …

Read More »

भूले कवि जानकीवल्लभ शास्त्री की कुछ बिसरी कविताएँ

आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री मुजफ्फरपुर के ऐसे क्लासिक हैं जिनके बारे में बात तो सब करते हैं लेकिन पढ़ता कोई नहीं है. उनके कुत्तों, उनकी बिल्लियों, उनकी गायों, उनकी विचित्र जीवन शैली की चर्चा तो सब करते हैं लेकिन उनकी कविताओं की चर्चा शायद ही कोई करता हो. पिछले दिनों पद्मश्री …

Read More »

वादे जुलूस नारे फिर-फिर वही नज़ारे

बिहार विधानसभा चुनावों के समय यह लिखा था. अब यूपी चुनावों के समय  इस पोस्ट की याद आ गई- प्रभातबिहार में विधानसभा चुनाव हैं. मतदान शुरू होने में दस-बारह दिन रह गए हैं. लेकिन मुजफ्फरपुर में देख रहा हूँ शहर की दीवारें साफ़ हैं, न नारों की गूँज है, न …

Read More »