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उन प्रथम, सुकुमार दिनों का वह उजला अनुभव

प्रसिद्ध पत्रकार प्रियदर्शन को हिंदी की की साहित्यिक दुनिया कवि-कथाकार के रूप में जानती-पहचानती है. समकालीन पीढ़ी के रचनाकारों में अपने नए मुहावरे से उन्होंने एक अलग पहचान बनाई है. अनुभव के सघन बिम्ब और सजग वैचारिकता निजी से लगते पाठ को भी सार्वजनिक बना देता है. मैं यहाँ उनकी …

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विद्यापति के गीत बाबा नागार्जुन का अनुवाद

यह कवि नागार्जुन की जन्मशताब्दी का साल है. इससे याद आया कि उन्होंने विद्यापति के गीतों का हिंदी में अनुवाद किया था. आज प्रस्तुत है विद्यापति के मूल पदों के साथ बाबा नागार्जुन के अनुवाद- जानकी पुल. १. सखि हे, कि पुछसि अनुभव मोय. सेह पिरिति अनुराग बखानिय तिल-तिल नूतन …

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अमलतास के फूल खिल चुके

आज सत्यानन्द निरुपम की कविताएँ. वे मूलतः कवि नहीं हैं, लेकिन इन चार कविताओं को पढकर आपको लगेगा की वे भूलतः कवि भी नहीं हैं. गहरी रागात्मकता और लयात्मकता उनकी कविताओं को एक विशिष्ट स्वर देती है, केवल पढ़ने की नहीं गुनने की कविताएँ हैं ये. इस विचार-आक्रांत समय में …

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