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बाबू कुंवर सिंह तोहरे राज बिना…

1857 के जुबानी किस्से अभी हाल में ही रूपा एंड कंपनी से इतिहासकार पंकज राग की पुस्तक आई है 1857– द ओरल ट्रेडिशन। पुस्तक में उन्होंने लोकगीतों एवं किस्से-कहानियों के माध्यम से 1857 के विद्रोह को समझने का प्रयास किया है। प्रस्तुत है उसका एक छोटा-सा अंश जिसका संबंध कुंवर …

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६० के हुए शिवमूर्ति

अस्सी के दशक में अपनी कहानियों से बड़ी लकीर खींचनेवाले शिवमूर्ति इस साल 60 साल के हो गए। मूलतया ग्रामीण आबोहवा के इस कथाकार की कसाईबाड़ा और तिरिया चरित्तर कहानियों ने गांव के ढहते हुए सामाजिक और राजनीतिक ढांचे की बदलती तस्वीर दिखाई थी। बाद के दौर में तर्पण और …

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नश्तर खानकाही की चार ग़ज़लें

नश्तर ख़ानकाही की शायरी में फ़कीराना रक्स है। कुछ-कुछ लोकगीतों की सी छंद, खयाल की सादगी। हिन्दी में उनकी ग़ज़लें हो सकती है पहले यदा-कदा कहीं छपी हो। इस गुमनाम शायर की चुनिंदा ग़ज़लें पढ़िए और खयालों में खो जाइए- =============================== 1. धड़का था दिल कि प्यार का मौसम गुज़र …

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