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शायरों-अदीबों की गली बल्लीमारान

बरसों पहले गुलज़ार ने एक टीवी धारावाहिक बनाया था ‘ग़ालिब’. उसके शीर्षक गीत में उन्होंने चूड़ीवालान से तुक मिलाते हुए बल्लीमारान का ज़िक्र किया था. उस बल्लीमारान का जिसकी गली कासिमजान में इस उपमहाद्वीप के शायद सबसे बड़े शायर ग़ालिब ने अपने जीवन के आखिरी कुछ  साल गुजारे थे. उसके …

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सरयू में काँप रही थी अयोध्या की परछाईं

अरुण देव की इस कविता में इतिहास के छूटे हुए सफों का ज़िक्र  है, उनमें  भूले हुए प्रसंग अक्सर पुराने दर्द की तरह उभर आते हैं. उनकी कवि-दृष्टि  वहाँ तक जाती है जहाँ से हम अक्सर नज़रें फेर लिया करते हैं. इस कविता में तहजीब की उस गली का दर्द …

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अज्ञेय की पांच दुर्लभ किताबों का पुनर्प्रकाशन

अज्ञेय  की जन्मशताब्दी को ध्यान में रखकर उनका मूल्यांकन-पुनर्मूल्यांकन ज़ारी है. सस्ता साहित्य मंडल प्रकाशन ने उनकी पांच दुर्लभ किताबों का प्रकाशन इस अवसर पर किया है. मुझे वे किताबें बहुत अच्छी लगीं. मैंने सोचा आपसे भी उन किताबों को साझा करूं- जानकी पुल. अज्ञेय ने निबंध में साहित्यकार के …

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