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भारतीय सिनेमा के कोलंबस दादा साहेब तोरणे

रामचंद्र गोपाल दादा साहेब तोरणे का नाम इतिहास-निर्माताओं में आना चाहिए था, लेकिन ‘पुंडलीक’ फिल्म के इस निर्माता-निर्देशक के नाम गुमनामी आई. 25 मई 1912 को ‘टाइम्स ऑफ इण्डिया’ में प्रकाशित विज्ञापन में ‘पुंडलीक’ को भारत की पहला कथा-चित्र बताया गया था और ग्रीव्स कॉटन कम्पनी में काम करने वाले …

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हिंदी लेखकों का गुस्सा क्या अपने अहं की तुष्टि तक ही होता है?

अभी इतवार को प्रियदर्शन का लेख आया था, जिसमें गौरव-ज्ञानपीठ प्रकरण को अधिक व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने का आग्रह किया गया था. वरिष्ठ लेखक बटरोही ने उसकी प्रतिक्रिया में कुछ सवाल उठाये हैं. सवाल गौरव सोलंकी या ज्ञानपीठ का ही नहीं है उस मनोवृत्ति का है जिसका शिकार हिंदी का …

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मीडिया धीरे-धीरे मनोरंजन बनेगा, कोरा मीडिया नहीं रह जाएगा।

आज सुबह-सुबह युवा और प्रखर मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार का यह लेख पढ़ा. साझा तो तभी करना चाहता था लेकिन साझा करते-करते रात हो गई. देखिये हमारा मीडिया कहां जा रहा है- जानकी पुल. ——————————————————————————————————  आदित्य बिड़ला समूह ने इंडिया टुडे, बिजनेस टुडे जैसी पत्रिकाएं प्रकाशित करने वाली कंपनी लिविंग मीडिया इंडिया …

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